Rajasthan News: प्रदेश में चुनावी घमासान— श्रीमाधोपुर में शहरी विकास मंत्री के बेटे ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में किया नामांकन
Rajasthan News: प्रदेश में चुनावी घमासान— श्रीमाधोपुर में शहरी विकास मंत्री के बेटे ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में किया नामांकन
छोटा अखबार।
पंचायती राज चुनावों के बीच राजस्थान की सियासत में 'परिवारवाद' का मुद्दा गरमा गया है। सूबे के शहरी विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा का परिवार इन दिनों अचानक सुर्खियों में आ गया है। श्रीमाधोपुर विधानसभा क्षेत्र और सीकर जिला परिषद चुनावों के लिए टिकट वितरण को लेकर खर्रा परिवार में मचे सियासी घटनाक्रम ने भारतीय जनता पार्टी के भीतर अंदरूनी खींचतान को उजागर कर दिया है। इसे लेकर कांग्रेस ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला है।
बेटे की बगावत और भाभी का टिकट कटना—
सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार उस वक्त गर्म हुआ जब बुधवार को मंत्री झाबर सिंह खर्रा के बड़े बेटे दुर्गा सिंह खर्रा ने श्रीमाधोपुर पंचायत समिति के वार्ड नंबर 19 से सदस्य पद के लिए निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन दाखिल कर दिया। मंत्री पुत्र के इस कदम से भाजपा खेमे में खलबली मच गई।
वहीं गुरुवार को खर्रा परिवार को दूसरा बड़ा झटका लगा। मंत्री खर्रा के भाई महावीर सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह ने जिला परिषद के वार्ड नंबर 23 से भाजपा प्रत्याशी के रूप में अपनी दावेदारी पेश करते हुए नामांकन दाखिल किया था। लेकिन गुरुवार देर शाम जब भाजपा ने आधिकारिक प्रत्याशियों की सूची जारी की, तो सूची से प्रतिभा सिंह का नाम नदारद मिला। पार्टी आलाकमान ने प्रतिभा सिंह का टिकट काटते हुए उनकी जगह सुंदरी देवी को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया।
दुसरी ओर टिकट कटने और मंत्री पुत्र की बगावत के बाद दिनभर की चर्चाओं का दौर जारी रहा। इस पूरे घटनाक्रम पर जब भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ से सवाल किया गया, तो उन्होंने बेहद सख्त और दोटूक रुख अपनाया। उन्होने कहा, "भारतीय जनता पार्टी में परिवारवाद बिल्कुल नहीं चलता है। पार्टी सिद्धांतों और जमीनी कार्यकर्ताओं की मेहनत के आधार पर फैसले लेती है, न कि किसी के रसूख या पारिवारिक पृष्ठभूमि को देखकर।" राठौड़ के इस बयान ने यह स्पष्ट कर दिया कि संगठन मंत्रियों या बड़े नेताओं के परिजनों को तवज्जो देकर कार्यकर्ताओं में गलत संदेश नहीं भेजना चाहता।
विपक्ष का भाजपा पर हमला—
मामले में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस मुद्दे पर तंज कसते हुए कहा, "यह बेहद हास्यास्पद है कि भाजपा अपने ही कद्दावर मंत्री के बेटे पर भरोसा नहीं जता पा रही है। जो पार्टी खुद को अनुशासित बताती है, उसके मंत्रियों के घरों में ही टिकटों को लेकर विद्रोह हो रहा है।" जूली ने आरोप लगाया कि भाजपा के भीतर आंतरिक लोकतंत्र खत्म हो चुका है और वे केवल कथनी और करनी में अंतर रखते हैं।
टिकट कटौतियों और निर्दलीय नामांकनों के बाद श्रीमाधोपुर और सीकर की स्थानीय राजनीति में समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। एक तरफ जहां सुंदरी देवी को टिकट मिलने से पार्टी का एक धड़ा संतुष्ट है, वहीं मंत्री झाबर सिंह खर्रा के समर्थकों में इस फैसले को लेकर अंदरूनी मायूसी देखी जा रही है। अब देखना यह होगा कि क्या मंत्री अपने बेटे दुर्गा सिंह को निर्दलीय चुनाव मैदान से हटने के लिए मना पाते हैं या फिर यह पारिवारिक और सियासी बगावत भाजपा के लिए इन पंचायती राज चुनावों में नई मुश्किलें खड़ी करेगी।

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