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Showing posts from October 14, 2020

जन्म और मृत्यु पंजीकरण के लिए आधार नंबर अनिवार्य नहीं —रजिस्ट्रार जनरल

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जन्म और मृत्यु पंजीकरण के लिए आधार नंबर अनिवार्य नहीं —रजिस्ट्रार जनरल छोटा अखबार। "देश में जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण रजिस्ट्रेशन ऑफ बर्थ्स एंड डेथ्स (आरबीडी) एक्ट, 1969 के प्रावधानों के तहत किया जाता है और आरबीडी एक्ट में कोई ऐसा प्रावधान नहीं है, जो किसी व्यक्ति के जन्म और मृत्यु के पंजीकरण के उद्देश्य से व्यक्ति की पहचान स्थापित करने के लिए आधार के इस्तेमाल की अनुमति प्रदान करता है। आधार के इस प्रकार के इस्तेमाल के लिए कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए धारा 57 (आधार का सत्यापन) यहां लागू नहीं होती है। इसलिए, जन्म और मृत्यु पंजीकरण के लिए आधार अनिवार्य नहीं है।" भारत के रजिस्ट्रार जनरल ने आंध्र प्रदेश के अनिल कुमार रजागिरि की ओर से सूचना का अधिकार के तहत मांगी जानकारी के जवाब में स्पष्ट कहा है कि जन्म और मृत्यु पंजीकरण के लिए आधार नंबर अनिवार्य नहीं है। रजागिरि ने सरकार से पूछा था कि क्या मृत्यु पंजीकरण के लिए आधार जरूरी है या नहीं? गृह मंत्रालय ने तीन अप्रैल 2019 के सर्कुलर का हवाला देते बताया कि, "देश में जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण रजिस्ट्रेशन ऑफ बर्थ्स एंड डेथ्स (आरबीडी)

अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में अब नहीं करना होगा इंतजार 

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अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में अब नहीं करना होगा इंतजार  छोटा अखबार। "बतादें कि सरकारी कार्मिक की मृत्यु के बाद आश्रित को 90 दिवस के भीतर अनुकम्पा नियुक्ति के लिए आवेदन करना होता है। इसके अलावा, आश्रित के नाबालिग होने की स्थिति में 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर बालिग होने के 3 वर्ष के भीतर और अधिकतम 40 वर्ष की आयु तक आवेदन करने का प्रावधान है।"  अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में मृत राज्य कर्मचारी के आश्रित को जल्द नियुक्ति देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अनुकंपा नियुक्ति नियमों के उस प्रावधान को समाप्त करने के निर्देश दिए हैं। जिसके कारण मृत कार्मिक के मूल विभाग में पद रिक्त नहीं होने पर उसके आश्रित के आवेदन को दो साल तक के लिए लंबित रखा जाता था और दो साल बाद भी पद रिक्त नहीं होता है तो किसी अन्य विभाग में नियुक्ति के लिए प्रक्रिया शुरू की जाती थी। इस नियम के कारण मृत राज्य कर्मचारी के आश्रित को नियुक्ति के लिए इंतजार करना पड़ता था, क्याेंकि जिस कार्मिक की मृत्यु के कारण वह नियुक्ति चाहता है उसके मूल विभाग में पद रिक्त नहीं है। गहलोत ने इस प्रावधान को समाप्त करने के