Article: पिघलेंगे ग्लेशियर, डूबेंगे शहर छोटा अखबार। आने वाले समय में धरती का तापमान कम से कम 1.8 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ना तय है। अगर तापमान इस स्तर तक पहुंचता है, तो भारी मात्रा में ग्लेशियर पिघलेंगे, समुद्र का जलस्तर बढ़ेगा और दुनिया भर के तटीय शहरों तथा इंसानी जीवन पर हाहाकार मच जाएगा। अब तापमान साल 2015 के पेरिस समझौते में तय किए गए 1.5 डिग्री सेल्सियस के सुरक्षित दायरे से कहीं आगे निकल चुका है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की एक नई रिपोर्ट में यह चेतावनी दी गई है। AI Photo रिपोर्ट के मुताबिक, तापमान में होने वाली हर एक अतिरिक्त वृद्धि चरम मौसम, ग्लेशियरों के पिघलने, पारिस्थितिकी तंत्र के नुकसान और तटीय शहरों के डूबने के खतरे को और खतरनाक रूप से बढ़ा देगी। यूएन की पहले जारी अन्य रिपोटों में भी चेताया जा रहा था कि अगर तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस से ऊपर गया, तो परिणाम अच्छे नहीं होंगे। अगर धरती का तापमान औद्योगिक क्रांति से पहले के मुकाबले 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया, तो साल 2100 तक एक चौथाई से ज्यादा ग्लेशियर पिघल जाएंगे। इससे समुद्र का जलस्तर 13 सेंटीमीटर तक ऊपर...