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Showing posts from February 14, 2020

राजस्थान विधानसभा में मुख्यमत्री का जवाब 

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राजस्थान विधानसभा में मुख्यमत्री का जवाब  छोटा अखबार। राजस्थान विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर अग्रेत्तर वाद—विवाद पर मुख्यमत्री के जवाब का सीधा प्रसारण जी ओ न्यूज राजस्थान  पर।

गांधीजी को भगत सिंह से दिक्कत क्यों थी?

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गांधीजी को भगत सिंह से दिक्कत क्यों थी? छोटा अखबार। भारत सरकार के प्रधान आर्थिक सलाहकार संजीव सान्याल ने गुजरात यूनिवर्सिटी में कहा कि देश के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भगत सिंह और अन्य क्रांतिकारियों को बचाने का प्रयास नहीं किया और आरोप लगाया कि भारत में स्वतंत्रता के इस वैकल्पिक इतिहास को दबाने के लिए क्रांतिकारियों की कहानी को जानबूझकर तोड़ा मरोड़ा गया था। खबर सूत्रों के अनुसार गुजरात यूनिवर्सिटी में भाषण देते हुए सान्याल ने कहा कि यह कहानी भारत की स्थापित राजनीति और स्वतंत्रता के बाद अंग्रेजों दोनों के लिए असुविधाजनक थी। सान्याल ने जोर देते हुए कहा कि क्रांतिकारियों के इस नजरिए को स्कूली पाठ्यक्रम में भी शामिल किया जाना चाहिए। यूनिवर्सिटी के छात्रों और फैकल्टी से कहा कि यह कहना मुश्किल है कि क्या महात्मा गांधी भगत सिंह या किसी अन्य क्रांतिकारी को फांसी से बचाने में सफल होते क्योंकि तथ्य मौजूद नहीं है। लेकिन उन्होंने इसका बहुत ज्यादा प्रयास नहीं किया। गांधी हिंसा को लेकर पर्याप्त खुश थे। अगर प्रथम विश्व युद्ध के लिए वे भारतीय सैनिकों को ब्रिटिश सेना में भेजने को तैयार थे तब उन्हें

नाबालिग को जेल में नहीं रखा जा सकता है — सुप्रीम कोर्ट

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नाबालिग को जेल में नहीं रखा जा सकता है — सुप्रीम कोर्ट छोटा अखबार। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की खंडपीठ ने कहा है कि किसी नाबालिग को जेल में या पुलिस हिरासत में नहीं रखा जा सकता है। साथ ही न्यायालय ने साफ किया कि किशोर न्याय बोर्ड मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकता है। देश में सभी किशोर न्याय बोर्ड को किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की अक्षरश: भावना का पालन करना ही चाहिए। बच्चों के संरक्षण के लिए बने कानून की उपेक्षा किसी के द्वारा नहीं की जा सकती। कम से कम पुलिस के द्वारा तो बिल्कुल भी नहीं।    न्यायालय ने यह बात उत्तर प्रदेश तथा दिल्ली में नागरिकता कानून के खिलाफ हुए प्रदर्शनों में  बच्चों को कथित रूप से पुलिस हिरासत में रखकर प्रताड़ित करने के मामले कही।  समाचार सूत्रों के अनुसार न्यायालय ने उत्तर प्रदेश और दिल्ली के बाल अधिकार संरक्षण आयोग को आरोपों की जांच करने के निर्देश भी दिये है। जवाब पेश करने के लिये कोर्ट ने   तीन हफ़्तों का समय दिया है।  कोर्ट ने किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 10 के तहत पुलिस द्वारा पकड़े गए बच्चे को विशेष किशोर पुलिस यूनिट या किसी नामित