Jaipur News: जेडीए आयुक्त सिद्धार्थ महाजन होंगे गिरफ्तार, वारंट जारी
Jaipur News: जेडीए आयुक्त सिद्धार्थ महाजन होंगे गिरफ्तार, वारंट जारी
छोटा अखबार।
जिला उपभोक्ता आयोग क्रम-2 ने भूखंड आवंटन से जुड़े एक पुराने मामले में जयपुर विकास प्राधिकरण के तत्कालीन आयुक्त सिद्धार्थ महाजन और जोन-9 के उपायुक्त सूर्यकांत शर्मा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। आयोग ने जयपुर पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिए हैं कि दोनों अधिकारियों को गिरफ्तार कर 12 अक्टूबर को आयोग के समक्ष पेश किया जाए। यह कड़ा आदेश परिवादी कृष्णा की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया।
क्या है पूरा मामला—
आपको बतादें कि पूरा विवाद जेडीए की प्रसिद्ध निलय कुंज आवास योजना से जुड़ा हुआ है। योजना के तहत परिवादी कृष्णा ने एक भूखंड के लिए आवेदन किया था। जेडीए द्वारा निकाली गई लॉटरी में कृष्णा को भूखंड संख्या 454 आवंटित किया गया। आवंटन की प्रक्रिया पूरी होने और जरूरी औपचारिकताएं निभाने के बाद परिवादी को उम्मीद थी कि जल्द ही उन्हें अपने आशियाने की जमीन का कब्जा मिल जाएगा। आवंटन पत्र हाथ में होने के बावजूद जेडीए के अधिकारियों ने परिवादी को भूखंड का भौतिक कब्जा सौंपने में ढिलाई बरती। परिवादी जेडीए कार्यालय के चक्कर काटता रहा, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के कारण निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी उसे जमीन का अधिकार नहीं मिल सका। करीब एक साल तक मानसिक रूप से परेशान होने और इंतजार करने के बाद, जब जेडीए स्तर पर कोई समाधान नहीं निकला, तो थक-हारकर परिवादी ने जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
उपभोक्ता आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व में परिवादी के पक्ष में आदेश जारी किए थे, लेकिन जेडीए प्रशासन ने आयोग के निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया। आदेशों की लगातार अनदेखी किए जाने पर परिवादी कृष्णा ने अधिकारियों के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की।
अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग क्रम-2 ने जेडीए अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। आयोग ने माना कि बार-बार अवसर दिए जाने के बाद भी अधिकारी अपने विधिक दायित्वों को पूरा करने में विफल रहे हैं और उन्होंने न्यायिक आदेशों की अवहेलना की है। इसी का संज्ञान लेते हुए आयोग ने इस बार सीधे गिरफ्तारी वारंट जारी करने का असाधारण कदम उठाया।
पुलिस कमिश्नर को निर्देश—
न्यायालय के आदेश की तामीर सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने जयपुर पुलिस कमिश्नर को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदारी सौंपी है। पुलिस विभाग को निर्देशित किया गया है कि वे दोनों अधिकारियों—सिद्धार्थ महाजन और सूर्यकांत शर्मा को हिरासत में लेकर नियत तारीख 12 अक्टूबर 2026 को आयोग के सामने हाजिर करें। इस फैसले ने यह साफ कर दिया है कि आम जनता के अधिकारों का हनन करने और अदालती आदेशों को हल्के में लेने वाले अधिकारियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। अब सभी की नजरें 12 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।

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