Rajasthan News: प्रदेश में अवैध पटाखों के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर सख्त कार्रवाई के निर्देश
Rajasthan News: प्रदेश में अवैध पटाखों के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर सख्त कार्रवाई के निर्देश
छोटा अखबार।
दीपावली के अवसर पर वायु प्रदूषण की रोकथाम, आमजन के स्वास्थ्य की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में शामिल राजस्थान के जिलों में पटाखों के निर्माण, बिक्री और उपयोग को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। निर्देशानुसार राजस्थान के एनसीआर क्षेत्र में शामिल अलवर, भरतपुर, दौसा, डीग, खैरथल-तिजारा और कोटपूतली-बहरोड़ जिलों में पटाखों के निर्माण, भंडारण, बिक्री व उपयोग को नियंत्रित करने के लिए विशेष व्यवस्था लागू की गई है। उक्त संबंध में अधिक जानकारी देते हुए पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन की शासन सचिव श्रीमती शैलजा देवल ने बताया कि एनसीआर क्षेत्र में केवल राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान द्वारा प्रमाणित ग्रीन पटाखे ही चलाने की अनुमति होगी। अन्य सभी प्रकार के पटाखों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
ग्रीन पटाखे चलाने के लिए 7 और 8 नवंबर, 2026 को दो निर्धारित समयावधियां तय की गई हैं। आमजन प्रातः 6 बजे से 7 बजे तक व रात्रि 8 बजे से 10 बजे तक ही ग्रीन पटाखे चला सकेंगे। निर्धारित समय के अतिरिक्त पटाखे चलाने की अनुमति नहीं होगी। वहीं पूर्व में लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध को 6 नवंबर, 2026 तक प्रभावी रखा गया है और निर्धारित दो दिवसीय छूट के पश्चात 9 नवंबर, 2026 से पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध पुनः प्रभावी हो जाएगा।
अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों के आसपास पटाखे चलाने पर प्रतिबंध—
श्रीमती शैलजा देवल ने बताया कि आमजन के स्वास्थ्य और संवेदनशील संस्थानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अस्पतालों, नर्सिंग होम, प्राथमिक व जिला स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों और शैक्षणिक संस्थानों को शांत क्षेत्र घोषित किया गया है। इन संस्थानों के 300 मीटर की परिधि में पटाखे चलाने की अनुमति नहीं होगी। उल्लेखनीय है कि, राज्य सरकार के सभी विभागों और एजेंसियों को निर्धारित समयावधि के अतिरिक्त पटाखे चलाने अथवा प्रतिबंधित क्षेत्रों में पटाखों के उपयोग की अनुमति नहीं देने के निर्देश दिए गए हैं।
पटाखों की बिक्री के लिए QR कोड अनिवार्य, ऑनलाइन बिक्री पर भी प्रतिबंध—
वहीं पटाखों की अवैध बिक्री एवं प्रतिबंधित उत्पादों की आपूर्ति रोकने के लिए सरकार ने बिक्री व्यवस्था को भी सख्त किया है। केवल उन्हीं ग्रीन पटाखों की बिक्री की अनुमति होगी, जिन पर उत्पाद-विशिष्ट QR कोड अंकित होगा। प्रत्येक पटाखा पैकेजिंग पर संबंधित QR कोड होना अनिवार्य है। QR कोड के माध्यम से निर्माता, NEERI प्रमाणन, PESO और जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी लाइसेंस, उत्पादक की संरचना व उत्पादन संबंधी प्रमाण-पत्रों का विवरण प्रदर्शित होना आवश्यक होगा। QR कोड के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ या उसकी प्रामाणिकता में हेरफेर को गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। निर्धारित और अधिकृत दुकानों व बिक्री स्थलों के अतिरिक्त पटाखों की बिक्री प्रतिबंधित रहेगी। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से पटाखों की बिक्री भी प्रतिबंधित होगी। इसके अतिरिक्त श्रृंखला में जुड़े पटाखों व पटाखों की मालाओं के निर्माण और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। बेरियम युक्त पटाखों व CSIR-NEERI द्वारा ग्रीन पटाखों के रूप में अनुमोदित नहीं किए गए किसी भी पटाखे के उपयोग की अनुमति नहीं होगी।
अवैध पटाखों की रोकथाम के लिए विशेष गश्ती दलों का गठन—
जिला कलक्टर, जिला पुलिस अधीक्षक और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को एनसीआर क्षेत्र में पटाखों के अवैध निर्माण, भंडारण, परिवहन व बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण के निर्देश दिए गए हैं। अवैध व पारंपरिक पटाखों के प्रवाह को रोकने के लिए दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में प्रवेश करने वाले वाहनों की जांच की जाएगी। उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार जब्ती और अन्य आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस अधिकारियों और अन्य कार्मिकों को शामिल करते हुए विशेष गश्ती दलों का गठन किया जाएगा। गश्ती दल निर्धारित बिक्री स्थलों, दुकानों एवं अन्य संवेदनशील स्थानों पर नियमित निरीक्षण करेंगे।
राज्य सरकार ने वायु प्रदूषण नियंत्रण और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की प्रभावी अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न विभागों व एजेंसियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी हैं। राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल, स्वायत्त शासन विभाग एवं नगरीय विकास विभाग,सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, शिक्षा विभाग,सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग सहित अतिरिक्त सभी संबंधित विभागों को अपने स्तर पर आवश्यक समन्वय स्थापित कर आदेशों की प्रभावी अनुपालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
उल्लंघन पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई—
गौरतलब है कि,जारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों, समूहों, निर्माताओं और व्यापारियों के विरुद्ध माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 और उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के अनुसार भी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। राज्य सरकार का उद्देश्य दीपावली के पर्व को पर्यावरण अनुकूल बनाने, वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और आमजन के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए प्रभावी व समन्वित व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

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