Rajasthan News: प्रदेश में 23 जिलों की 80 तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित, गले छह महीने तक नहीं होगी लगान की वसूली

Rajasthan News: प्रदेश में 23 जिलों की 80 तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित, गले छह महीने तक नहीं होगी लगान की वसूली


छोटा अखबार।

राजस्थान में इस साल मानसून की बेरुखी, कम बारिश, गिरते भूजल स्तर और उसके कारण खरीफ की फसलों को पहुंचे भारी नुकसान ने प्रदेश के किसानों की चिंताओं बढ़ा दिया है। खेतों में खड़ी फसलें पानी के अभाव में दम तोड़ चुकी हैं, जिससे किसानों के सामने आजीविका का बड़ा संकट गहराता जा रहा है। इस स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार के आपदा प्रबंधन, सहायता और नागरिक सुरक्षा विभाग ने त्वरित कदम उठाए हैं। विभाग की ओर से दो अलग-अलग सूखा अधिसूचनाएं जारी की गई हैं, जिसके तहत प्रदेश के 23 जिलों की कुल 80 तहसील क्षेत्रों को सूखाग्रस्त श्रेणी में शामिल किया गया है।

सरकार द्वारा जारी अधिसूचनाओं के अनुसार सूखाग्रस्त घोषित की गई 80 तहसीलों में से 53 तहसीलों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। जिन्हें 'गंभीर' सूखाग्रस्त श्रेणी में रखा गया है। इस गंभीर अकाल और अभाव की स्थिति के बीच प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को फौरी राहत देने के लिए राज्य सरकार ने इन सभी चिन्हित क्षेत्रों में अगले छह महीने तक के लिए भूमि राजस्व (लगान) वसूली पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।

आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी दोनों अधिसूचनाओं में प्रभावित क्षेत्रों का विस्तृत ब्योरा दिया गया है। पहली अधिसूचना के तहत सीमावर्ती और पश्चिमी राजस्थान के हिस्सों में बड़ा प्रभाव देखा गया है। इसमें बाड़मेर और बालोतरा जिले के प्रभावित हिस्सों के अलावा जालोर की 9, जोधपुर की 7, डूंगरपुर की 7, जैसलमेर की 5, फलोदी की 5 और बांसवाड़ा की 3 तहसीलें शामिल हैं। इसके अतिरिक्त चूरू, पाली, सिरोही, ब्यावर और नागौर जिले की भी एक-एक तहसील को इस पहली सूची में शामिल किया गया है।

वहीं विभाग द्वारा जारी की गई दूसरी अधिसूचना में सूखे की मार झेल रहे अन्य क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इस सूची में पाली जिले की 7 और जोधपुर की 5 तहसीलें शामिल हैं। इनके अलावा जैसलमेर की 2, फलोदी की 2 और चूरू, जालोर, बाड़मेर, ब्यावर व बीकानेर जिले की एक-एक तहसील को सूखाग्रस्त माना गया है। इस प्रकार कुल 80 तहसीलों में कृषि और जल उपलब्धता के मोर्चे पर आपातकालीन हालात बन चुके हैं।

फसलों की बर्बादी के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में पशुधन के लिए चारे और पानी का भी गंभीर संकट खड़ा हो गया है, क्योंकि प्राकृतिक चारे के स्रोत और चारागाह पूरी तरह सूख चुके हैं। किसानों और पशुपालकों को इस दोहरी मार से बचाने के लिए सरकार ने विशेष प्रबंध करने के निर्देश दिए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में ग्राम सेवा सहकारी समितियों (जीएसएस) के माध्यम से स्थानीय स्तर पर अनुदानित दरों पर गुणवत्तापूर्ण चारा और अन्य आवश्यक पशु आहार जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं उपलब्ध करवाने की मुकम्मल व्यवस्था की जायेगी। 

सरकार के इस कदम से किसानों को कुछ हद तक आर्थिक संबल मिलने की उम्मीद है, लेकिन भूजल स्तर में आ रही लगातार गिरावट और आगामी रबी सीजन की बुवाई के लिए पानी की अनुपलब्धता अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। मौसम की इस मार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है और अब प्रभावित जिलों के प्रशासन को युद्ध स्तर पर राहत पैकेजों के क्रियान्वयन में जुटना होगा ताकि संकटग्रस्त किसानों तक समय पर मदद पहुंचाई जा सके।

Comments

Popular posts from this blog

सरकार का सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग फेल, रुपयों में छपवानी पड़ रही है, बजट घोषणा की प्रेस विज्ञप्ती

देश में 10वीं बोर्ड खत्म, अब बोर्ड केवल 12वीं क्‍लास में

आज शाम 7 बजे व्यापारी करेंगे थाली और घंटी बजाकर सरकार का विरोध

रीको में 238 पदों की होगी सीधी भर्ती सरकार के आदेश जारी 

ग्राम पंचायत स्तर पर युवाओं को मिलेगा रोजगार

फ़ार्मा कंपनियां डॉक्टरों को रिश्वत में लड़कियां उपलब्ध कराती हैं — प्रधानसेवक

मौलिक अधिकार नहीं है प्रमोशन में आरक्षण — सुप्रीम कोर्ट

10वीं और 12वीं की छात्राओं के लिऐ खुशखबरी, अब नहीं लगेगी फीस