Rajasthan News: कृषि विभाग और डाक विभाग के बीच हुआ समझौता, किसानों को मिलेगा गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान
Rajasthan News: कृषि विभाग और डाक विभाग के बीच हुआ समझौता, किसानों को मिलेगा गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान
छोटा अखबार।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की भ्रष्टाचार के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति की अनुपालना में कृषि विभाग ने किसानों के हितों की सुरक्षा, कृषि आदानों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता व जवाबदेही को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। कृषि विभाग ने प्रदेश में बीज, उर्वरक एवं कीटनाशक रसायनों के नमूनों की जांच प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष, गोपनीय, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को पंत कृषि भवन में कृषि विभाग, राजस्थान सरकार और भारतीय डाक विभाग के मध्य एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन साइन किया गया। इस समझौते के माध्यम से कृषि आदानों के नमूने एकत्र करने से लेकर उन्हें प्रयोगशालाओं तक पहुंचाने, परीक्षण करने और जांच परिणाम जारी करने की प्रक्रिया को डिजिटल व व्यवस्थित बनाया जाएगा। इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि नमूना लेने वाले निरीक्षक को यह जानकारी नहीं होगी कि नमूना किस प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जाएगा और प्रयोगशाला को भी संबंधित डीलर अथवा निर्माता की पहचान की जानकारी नहीं होगी।
कृषि आदानों की जांच व्यवस्था में बड़ा सुधार—
वर्तमान में कृषि आदानों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विभाग द्वारा विभिन्न स्तरों पर नमूने लेकर प्रयोगशालाओं में जांच कराई जाती है। इस प्रक्रिया में नमूनों के संग्रहण, पैकिंग, परिवहन, प्रयोगशाला आवंटन और परीक्षण परिणामों के प्रबंधन में अनेक स्तरों पर मानवीय हस्तक्षेप की संभावना रहती है। नई व्यवस्था में AgriQMS मोबाइल ऐप और भारतीय डाक विभाग की स्पीड पोस्ट सेवाओं के माध्यम से पूरी प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और पारदर्शी बनाया जाएगा। इससे नमूनों की अदला-बदली, पहचान उजागर होने, अनावश्यक देरी और परीक्षण प्रक्रिया को प्रभावित करने जैसी संभावनाओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में सहायता मिलेगी।
निरीक्षक मौके पर ही डिजिटल माध्यम से लेंगे नमूने—
नई व्यवस्था के अंतर्गत कृषि आदान निरीक्षक AgriQMS मोबाइल ऐप के माध्यम से मौके पर ही नमूना संग्रहण की प्रक्रिया पूरी करेंगे। नमूना लेते समय नमूना संग्रहण स्थल की जीपीएस आधारित जियो-टैगिंग की जाएगी तथा संबंधित उत्पाद की तस्वीरें, उत्पाद के विवरण और आवश्यक दस्तावेज डिजिटली लिए जाएंगे। नमूने की पहचान के लिए सिस्टम द्वारा क्यूआर कोड जनरेट किया जाएगा। साथ ही नमूने को सुरक्षित रखने के लिए टैम्पर-प्रूफ पैकिंग की जाएगी। वहीं नमूना संग्रहण का डिजिटल रेकार्ड उपलब्ध होगा और बाद में रेकार्ड में अनधिकृत बदलाव अथवा नमूने से छेड़छाड़ की संभावनाओं को कम किया जा सकेगा।
निरीक्षक अपनी पसंद की प्रयोगशाला में नहीं भेज सकेंगे नमूने—
नई व्यवस्था के तहत सबसे महत्वपूर्ण विशेषता प्रयोगशालाओं का 'सिस्टम आधारित रैंडम आवंटन' है। इसमें AgriQMS प्रणाली स्वतः निर्धारित करेगी कि नमूना किस अधिकृत प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजा जाएगा। इससे किसी विशेष प्रयोगशाला के चयन में व्यक्तिगत हस्तक्षेप की संभावना समाप्त करने में सहायता मिलेगी और प्रयोगशाला को नमूने से संबंधित डीलर अथवा निर्माता की पहचान उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। यह दोहरी गोपनीयता व्यवस्था परीक्षण प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को मजबूत करेगी।
भारतीय डाक विभाग के माध्यम से नमूनों का सुरक्षित परिवहन—
समझौते के अंतर्गत कृषि विभाग द्वारा डाक विभाग को जयपुर में भेजा जाएगा, वहां पर नमूनों की पहचान को मास्क किया जाएगा। इसके बाद डाक विभाग प्रदेशभर से एकत्र किए गए नमूनों को स्पीड पोस्ट एवं बिजनेस पोस्ट सेंटर सेवाओं के माध्यम से अधिकृत प्रयोगशालाओं तक पहुंचाएगा। डाक विभाग नमूनों की ट्रैकिंग की सुविधा प्रदान करेगा। उक्त समझौता तीन वर्ष की अवधि के लिए किया गया है, जिसे आपसी सहमति से आगे बढ़ाया जा सकेगा। भारतीय डाक विभाग द्वारा कृषि विभाग को Book Now Pay Later सुविधा भी प्रदान की जाएगी।
किसानों को मिलेंगे महत्वपूर्ण लाभ—
कृषि उत्पादन और किसानों की आय काफी हद तक गुणवत्तापूर्ण बीज, उर्वरक और कीटनाशकों की उपलब्धता पर निर्भर करती है। नकली, अमानक अथवा घटिया कृषि आदानों के उपयोग से किसानों को आर्थिक नुकसान होने के साथ-साथ फसलों की उत्पादकता भी प्रभावित हो सकती है। नई डिजिटल गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था से किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी। निष्पक्ष जांच से अमानक उत्पादों की पहचान एवं उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई अधिक प्रभावी हो सकेगी।
भ्रष्टाचार और मिलीभगत की संभावनाओं पर प्रभावी नियंत्रण—
कृषि आदानों के गुणवत्ता नियंत्रण में सुशासन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनेगी। फेसलेस और कॉन्टैक्टलेस प्रणाली से नमूना संग्रहण, प्रयोगशाला आवंटन व परीक्षण के दौरान अनावश्यक व्यक्तिगत संपर्क और प्रभाव की संभावनाएं कम होंगी। सिस्टम आधारित प्रयोगशाला आवंटन से किसी विशेष नमूने को मनचाही प्रयोगशाला में भेजने की संभावना को नियंत्रित किया जा सकेगा। डिजिटल हस्ताक्षर, जियो-टैगिंग, QR कोड और टैम्पर-प्रूफ पैकिंग से नमूना संग्रहण की प्रामाणिकता बढ़ेगी। ऑनलाइन परीक्षण परिणाम व डिजिटल अभिलेखों से जवाबदेही सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी। इस प्रकार नई व्यवस्था केवल नमूनों के परिवहन में सुधार नहीं, बल्कि कृषि गुणवत्ता नियंत्रण की संपूर्ण कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक व्यापक प्रशासनिक सुधार है। इससे संबंधित पक्षों को निष्पक्ष परीक्षण और पुनः परीक्षण की निर्धारित प्रक्रिया का लाभ मिल सकेगा।
इस दौरान कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने बताया कि राज्य सरकार प्रदेश के किसानों को गुणवत्तापूर्ण एवं प्रमाणित बीज, उर्वरक और कीटनाशक उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कृषि आदानों की गुणवत्ता का सीधा संबंध किसानों की फसल, उत्पादन लागत, उत्पादकता व आय से है। इसलिए गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था का निष्पक्ष और विश्वसनीय होना अत्यंत आवश्यक है।
वहीं भारतीय डाक विभाग के सहायक पोस्ट मास्टर जनरल सुभाष चन्द मीणा ने AgriQMS ऐप के माध्यम से डाक विभाग द्वारा किए जाने वाले कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने कृषि आदानों के नमूनों को सुरक्षित एवं समयबद्ध तरीके से अधिकृत प्रयोगशालाओं तक पहुंचाने हेतु डाक विभाग की ओर से आवश्यक सहयोग एवं सेवाएं प्रदान करने का आश्वासन दिया। समझौता ज्ञापन के अवसर पर कृषि आयुक्तालय के समस्त अतिरिक्त निदेशक, संयुक्त निदेशक और गुण नियंत्रण शाखा के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। भारतीय डाक विभाग की ओर से राजेश पारीक, रोहित जैन और नफीस खान भी उपस्थित रहे।


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