Rajasthan News: प्रदेश में कम बारिश से जल संकट को देखते हुये सरकार ने शुरू की आपातकालीन योजना, कलक्टरों को दिये विशेषाधिकार
Rajasthan News: प्रदेश में कम बारिश से जल संकट को देखते हुये सरकार ने शुरू की आपातकालीन योजना, कलक्टरों को दिये विशेषाधिकार
छोटा अखबार।
प्रदेश में इस वर्ष कमजोर मानसून और कम बारिश के चलते आगामी महीनों में प्रदेश के मौजूदा जलस्रोतों से पेयजल की उपलब्धता में बड़ी गिरावट आने की आशंका है। इस संभावित संकट को भांपते हुए राज्य सरकार ने समय रहते तैयारियां तेज कर दी हैं। पानी की किल्लत से निपटने और आपातकालीन स्थितियों को संभालने के लिए जलदाय विभाग द्वारा जिलेवार आपातकालीन योजना तैयार किया जा रहा है। संकट के समय स्थिति अनियंत्रित न हो, इसके लिए सरकार ने जमीनी स्तर पर प्रशासनिक अधिकारियों को मजबूत करने का फैसला लिया है। पेयजल संकट से तुरंत और प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सरकार ने प्रदेश में जिला कलक्टरों को अक्टूबर से दिसम्बर तक की अवधि के लिए हर जिले में 75 लाख रुपए तक के पेयजल कार्यों के प्रस्तावों को सीधे मंजूरी देने के अधिकार दे दिए गए हैं। इससे आपातकालीन स्थितियों में फाइलों के अटकने और मुख्यालय से मंजूरी के इंतजार में होने वाली देरी से बचा जा सकेगा और व्यवस्थाएं तुरंत लागू हो सकेंगी।
जलदाय विभाग द्वारा बनाए जा रहे इस विशेष आपातकालीन योजना में प्रत्येक जिले के पेयजल स्रोतों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की जा रही है। इसमें भू-जल के गिरते स्तर, ट्यूबवेल और खुले कुओं की वर्तमान स्थिति के साथ-साथ वैकल्पिक जलस्रोतों की संभावनाओं का व्यापक आकलन किया जा रहा है। जिलों से मिलने वाली जमीनी रिपोर्ट के आधार पर उन सभी संवेदनशील क्षेत्रों को पहले ही चिह्नित किया जाएगा, जहां आने वाले समय में जलापूर्ति सबसे अधिक प्रभावित होने की आशंका है।
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चिह्नित किए गए संकटग्रस्त क्षेत्रों में जल संकट को दूर करने के लिए जलदाय विभाग निम्नलिखित प्राथमिकताओं पर कार्य करेगा—
1. नए ट्यूबवेल और बोरवेल: अत्यधिक प्रभावित और डार्क जोन से इतर क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार नए ट्यूबवेल खुदवाए जाएंगे।
2. मरम्मत और रखरखाव: जलस्रोतों पर लगी खराब पंप-मोटरों को तुरंत बदला जाएगा और लीकेज रोकने के लिए पाइपलाइनों की युद्ध स्तर पर मरम्मत की जाएगी।
3. टैंकरों से जलापूर्ति: जिन दूर-दराज के इलाकों या ढाणियों में पानी के पारंपरिक स्रोत पूरी तरह सूख जाएंगे, वहां पीएचईडी के समन्वय से पानी के टैंकरों या अन्य वैकल्पिक माध्यमों से पेयजल पहुंचाया जाएगा। इसके लिए भी प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं।
गंभीर होता संकट और बांधों की स्थिति—
आपको बतादें कि रिपोर्टों के अनुसार, राज्य के प्रमुख बांधों में पानी का स्टॉक पिछले वर्ष की तुलना में करीब 28 प्रतिशत तक कम दर्ज किया गया है। वर्तमान में बांध अपनी कुल क्षमता के केवल 62 प्रतिशत के आसपास ही भर पाए हैं। यही वजह है कि राज्य के कई शहरों और ग्रामीण इलाकों में अभी से ही जलापूर्ति का अंतराल बढ़ गया है।
सरकार के इस समय रहते उठाए गए कदमों का मुख्य उद्देश्य यही है कि सर्दियों और आगामी गर्मियों के महीनों में आम जनता और पशुधन को बूंद-बूंद पानी के लिए न तरसना पड़े। प्रशासन पूरी मुस्तैदी के साथ हर जिले की रिपोर्ट तैयार कर पानी के बेहतर प्रबंधन में जुट गया है।

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