C S NEWS: प्रदेश में ‘विकसित राजस्थान-2047’ के लक्ष्यों में सक्रिय भागीदारी निभाएं बैंक —मुख्य सचिव
C S NEWS: प्रदेश में ‘विकसित राजस्थान-2047’ के लक्ष्यों में सक्रिय भागीदारी निभाएं बैंक —मुख्य सचिव
छोटा अखबार।
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास एवं राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी), राजस्थान के अध्यक्ष और बैंक ऑफ बड़ौदा के कार्यपालक निदेशक संजय वी. मुदालियर की सह-अध्यक्षता में गुरुवार को एसएलबीसी की 170वीं बैठक आयोजित हुई। बैठक में क्रेडिट ग्रोथ, वित्तीय समावेशन, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि बैंक क्रेडिट ग्रोथ के साथ-साथ वित्तीय समावेशन पर भी विशेष ध्यान दें, ताकि समाज के हर वर्ग तक संस्थागत वित्तीय सेवाओं का लाभ पहुंच सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश के समावेशी आर्थिक विकास में बैंकिंग क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है और बैंक सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
श्री श्रीनिवास ने कहा कि बैंक केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न क्रेडिट वितरण और रोजगारोन्मुखी योजनाओं के अंतर्गत प्राप्त आवेदनों में अधिकाधिक ऋण वितरण किया जाना सुनिश्चित करें, जिससे कि ‘विकसित राजस्थान-2047’ के लक्ष्यों की दिशा में अपेक्षित प्रगति व वृद्धि दर सुनिश्चित की जा सके और जिला स्तर पर आयोजित होने वाली DLRC व DLCC बैठकों में प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र के अंतर्गत ऋण वितरण की समीक्षा की जावें, जिससे कि सभी जिलों में प्रभावी क्रेडिट वितरण हो सके।
मुख्य सचिव ने साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों की रोकथाम के लिए बैंकों से सक्रिय सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि साइबर वित्तीय अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए बैंकों, पुलिस एवं संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। मुख्य सचिव ने ‘विकसित राजस्थान-2047’ के विजन के चार प्रमुख स्तंभों—युवा शक्ति, नारी शक्ति, अन्नदाता और सुशासन/नीति-वित्त एवं प्रशासन—पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों को सशक्त बनाने व समाज के प्रत्येक वर्ग तक वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में बैंक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।
श्री मुदालियर ने प्रदेश में वित्तीय समावेशन को और मजबूत बनाने और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में बैंकों की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने बैंकिंग सेवाओं को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी देते हुए 1930 साइबर क्राइम कॉल सेंटर के भ्रमण और ‘स्मार्ट बैंकिंग व सेफ बैंकिंग 2.0’ अभियान का उल्लेख किया। वहीं बताया कि राज्य सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक के सहयोग से यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस (ULI) को ई-धरती पोर्टल से जोड़ा है, जिससे भूमि अभिलेखों में ऋण संबंधी प्रविष्टियों की प्रक्रिया ऑनलाइन और सरल हुई है।
बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 की वार्षिक साख योजना एवं विभिन्न रोजगारोन्मुखी, वित्तीय समावेशन और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में बैंकों की प्रगति की समीक्षा की गई। बैंकों के बेहतर प्रदर्शन की सराहना करते हुए आगामी तिमाहियों में भी इसे जारी रखने पर जोर दिया गया, ताकि प्रदेश में रोजगारोन्मुखी योजनाओं, वित्तीय समावेशन एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को और सुदृढ़ किया जा सके। इस दौरान सदस्य बैंकों के लिए निर्धारित लक्ष्यों और विभिन्न व्यावसायिक मानदंडों पर उनकी प्रगति की समीक्षा की गई। वहीं राज्य सरकार से संबंधित लंबित बैंकिंग विषयों और विभिन्न योजनाओं की प्रगति पर चर्चा कर उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बैंकों और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया। भारतीय रिजर्व बैंक व राजस्थान पुलिस की साइबर अपराध शाखा की ओर से भी संबंधित विषयों पर प्रस्तुतीकरण दिया गया।

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