Rajasthan News: प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं के वार्डों की लॉटरी स्थगित, अब 17-18 सितंबर को निकलेगी लॉटरी

Rajasthan News: प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं के वार्डों की लॉटरी स्थगित, अब 17-18 सितंबर को निकलेगी लॉटरी 


छोटा अखबार।

राज्य सरकार ने पंचायतीराज संस्थाओं के चुनावों को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। सरकार ने 17 और 18 अगस्त को आयोजित होने वाली पंचायतीराज संस्थाओं के वार्डों की आरक्षण लॉटरी को स्थगित कर अब यह लॉटरी ठीक एक महीने बाद यानी 17 और 18 सितंबर को आयोजित की जाएगी। वहीं इस स्थगन का असर शहरी निकायों के वार्डों के निर्धारण पर नहीं पड़ेगा। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, सोमवार (17 अगस्त) को प्रदेश के 309 शहरी निकायों के वार्डों की आरक्षण लॉटरी प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा किया जाएगा। सरकार के इस औचक फैसले ने ग्रामीण राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। 

ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के शासन सचिव द्वारा जारी आदेश के बाद जिला मुख्यालयों पर चल रही तैयारियां अचानक रोक दी गई हैं। इस स्थगन के बाद जिला प्रमुख, प्रधान, सरपंच और पंचायत समिति सदस्यों के पदों के लिए चुनावी गणित बिठा रहे उम्मीदवारों को अब एक महीने का और इंतजार करना होगा। विभाग के सूत्रों के अनुसार, पंचायतीराज संस्थाओं के पुनर्गठन, तकनीकी कारणों और प्रशासनिक व्यस्तताओं को देखते हुए प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। जिला स्तर पर पुनर्गठित और नए समीकरणों के आधार पर सितंबर के मध्य में वार्डों के आरक्षण की लॉटरी निकाली जाएगी। 

दुसरी और स्वायत्त शासन विभाग के तय कार्यक्रम के अनुसार सोमवार को राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर 309 शहरी निकायों के लिए आरक्षण लॉटरी निकालने का काम सुबह से ही प्रारंभ हो गया है। इस प्रक्रिया के तहत नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं के कुल 10,245 वार्डों का श्रेणीवार (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए) आरक्षण तय किया जा रहा है। इस प्रक्रिया की वीडियोग्राफी करवाई जा रही है और जिला कलेक्टरों की निगरानी में पूरी पारदर्शिता के साथ पर्चियां निकाली जा रही हैं। शहरी क्षेत्रों के भावी पार्षदों और चेयरमैन पद के दावेदारों की नजरें कलेक्ट्रेट परिसरों पर टिकी हुई हैं, क्योंकि इस लॉटरी के नतीजों से ही तय होगा कि वे आगामी चुनाव में किस वार्ड से अपनी किस्मत आजमा सकेंगे।

अपको बतादें कि शहरी निकायों और पंचायतीराज संस्थाओं की लॉटरी एक साथ प्रस्तावित होने के कारण जिला प्रशासनों पर भारी दबाव था। पंचायतीराज विभाग के इस फैसले से जिला निर्वाचन अधिकारियों और प्रशासनिक अमले को बड़ी राहत मिली है। अब प्रशासन पूरा ध्यान शहरी निकायों के वार्डों के निष्पक्ष निर्धारण पर केंद्रित कर पा रहा है। सरकार ने इसे विशुद्ध रूप से प्रक्रियात्मक व्यवस्था बताया है। आगामी सितंबर माह में होने वाली पंचायतीराज लॉटरी के लिए नए सिरे से कार्यक्रम तैयार किया जाएगा, ताकि उस समय भी बिना किसी त्रुटि के सुचारू रूप से कार्य संपन्न किया जा सके।

इस प्रशासनिक फेरबदल का सीधा असर राज्य की स्थानीय राजनीति पर दिखाई दे रहा है। शहरी क्षेत्रों में जहां लॉटरी खुलने के साथ ही चुनावी बिसात बिछनी शुरू हो गई है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में संभावित प्रत्याशियों को अपनी गोटियां सेट करने के लिए 30 दिन का और वक्त मिल गया है। कई क्षेत्रों में आरक्षण के नियमों को लेकर असमंजस बना हुआ था, जिसे दूर करने में अब प्रशासनिक अधिकारियों को भी पर्याप्त समय मिल सकेगा। कुल मिलाकर, सोमवार का दिन शहरी उम्मीदवारों के लिए भाग्य के फैसले का दिन साबित हो रहा है, जबकि ग्रामीण जनप्रतिनिधियों की किस्मत का पिटारा अब सितंबर महीने में ही खुलेगा।

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