Rajasthan News: प्रदेश के चार प्रमुख हाट बाजारों को पीपीपी मॉडल पर विकसित कर रही है सरकार
Rajasthan News: प्रदेश के चार प्रमुख हाट बाजारों को पीपीपी मॉडल पर विकसित कर रही है सरकार
छोटा अखबार।
राजस्थान के पारंपरिक दस्तकारों, बुनकरों, महिला स्वयं सहायता समूहों और लघु उद्यमियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक नई पहल की है। हस्तशिल्पियों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य दिलाने और बिचौलियों से मुक्त सीधा बाजार उपलब्ध कराने के लिए राज्य के प्रमुख हाटों को अब सार्वजनिक निजी भागीदारी मॉडल पर संचालित किया जाएगा। मुख्यमंत्री की बजट घोषणा की पालना में उद्योग एवं वाणिज्य विभाग ने इस योजना को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा 27 जून, 2026 को 'अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस' के अवसर पर की गई घोषणा के तहत प्रथम चरण में राज्य के चार प्रमुख हाटों को पीपीपी मॉडल पर विकसित किया जा रहा है। इसमें अलवर, पुष्कर, जैसलमेर और नाथद्वारा हाटों का संचालन और प्रबंधन निजी सहभागिता के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए उद्योग प्रोत्साहन संस्थान के माध्यम से 'रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल' भी जारी कर दिया गया है और बिडिंग प्रक्रिया पूरी होते ही हाटों के संचालन का जिम्मा निजी विकासकर्ताओं को सौंप दिया जाएगा।
श्री अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का उद्देश्य इन हाटों को केवल पारंपरिक बिक्री केंद्र तक सीमित रखना नहीं है। सरकार इन्हें दस्तकारों, बुनकरों और लघु उद्यमियों के लिए एक आधुनिक बाजार, प्रदर्शन केंद्र और बेहतरीन विपणन मंच के रूप में विकसित करना चाहती है। पीपीपी मॉडल पर आने से इन हाटों में विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा, आधुनिक सुविधाएं और बेहतर प्रबंधन देखने को मिलेगा। इससे न केवल स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा बल्कि पर्यटन मानचित्र पर भी इन हाटों की नई पहचान बनेगी।
उन्होने बताया कि इन हाटों के आधुनिकरण का सबसे बड़ा लाभ राज्य के 'एक जिला एक उत्पाद' और 'भौगोलिक संकेतक' प्राप्त विशिष्ट उत्पादों को मिलेगा। राजस्थान के हर जिले के प्रसिद्ध हस्तशिल्प, जैसे जयपुर की ब्लू पॉटरी, पोकरण के क्ले आर्ट, सांगानेरी प्रिंट और कोटा डोरिया जैसी कलाकृतियों को इन हाटों में स्थायी जगह मिलेगी। महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए घरेलू और हस्तनिर्मित उत्पादों को भी बड़े खरीदारों तक पहुंचाने के लिए यहां विशेष काउंटर और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी और इस नई व्यवस्था से दोतरफा लाभ होगा। एक तरफ जहां उपभोक्ताओं व पर्यटकों को एक ही छत के नीचे बिना किसी मिलावट के सीधे दस्तकारों से निर्मित शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद मिल सकेंगे। वहीं दूसरी तरफ, ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले हुनरमंद कलाकारों को अपने माल की बिक्री के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। उन्हें सीधे उपभोक्ता मिलने से उत्पादों का शत-प्रतिशत और उचित मूल्य प्राप्त होगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी।
उन्होने बताया कि अलवर, पुष्कर, जैसलमेर और नाथद्वारा राज्य के प्रमुख पर्यटन और धार्मिक केंद्र हैं। यहां देश-विदेश से हर साल लाखों की संख्या में पर्यटक आते हैं। पीपीपी मॉडल पर इन हाटों के सुविधायुक्त और आकर्षक बनने से पर्यटकों का रुझान बढ़ेगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर और हस्तशिल्प कला का वैश्विक स्तर पर प्रचार-प्रसार भी हो सकेगा। उद्योग विभाग इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और त्वरित गति से पूरा करने में जुटा है ताकि जल्द से जल्द दस्तकारों को इसका लाभ मिलना शुरू हो सके।

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