Rajasthan News: प्रदेश में अब ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया के लिए होगी ऑनलाइन निगरानी

Rajasthan News: प्रदेश में अब ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया के लिए होगी ऑनलाइन निगरानी 


छोटा अखबार।

शहरों की स्वच्छता अब केवल कचरे के निस्तारण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कचरे को संसाधन में परिवर्तित करने और चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ेगी। इसी उद्देश्य से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रावधानों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर शुक्रवार को राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल में प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो के सहयोग से संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इस दौरान प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो के निदेशक अनुभव बैरवा, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के मुख्य पर्यावरण अभियंता प्रेमालाल, अतिरिक्त मुख्य पर्यावरण अभियंता भुवनेश माथुर और स्वायत्त शासन विभाग के मुख्य अभियंता अरुण व्यास ने संचार माध्यमों के प्रतिनिधियों को संबोधित किया। 

अतिरिक्त मुख्य पर्यावरण अभियंता भुवनेश माथुर ने बताया कि 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी नए नियमों में स्रोत स्तर पर कचरे के पृथक्करण को विशेष महत्व दिया गया है। इसके तहत गीले कचरे, सूखे कचरे, स्वच्छता संबंधी कचरे और विशेष/घरेलू खतरनाक कचरे को अलग-अलग एकत्रित व संग्रहित करने पर जोर दिया गया है। उन्होने कहा कि इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल कचरा एकत्र करना नहीं, बल्कि स्रोत पर ही पृथक्करण सुनिश्चित करते हुए पुनर्चक्रण और अपशिष्ट प्रसंस्करण की पूरी श्रृंखला को अधिक प्रभावी बनाना है।

वहीं स्थानीय स्वायत्त शासन विभाग के मुख्य अभियंता अरुण व्यास नियमों पर प्रकाश डालते हुये बताया कि नए नियमों में थोक अपशिष्ट उत्पादकों के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। उन्होने कहा कि निर्धारित सीमा के अंतर्गत आने वाले बड़े अपशिष्ट उत्पादकों—जैसे बड़े आवासीय परिसर, होटल, संस्थान और अन्य प्रतिष्ठानों—को अपने परिसर में ही जैविक कचरे के प्रसंस्करण के लिए कम्पोस्टिंग, जैव-मीथेनीकरण अथवा अन्य अनुमोदित तकनीकों का उपयोग करना होगा और पुनर्चक्रण योग्य एवं खतरनाक अपशिष्ट का अधिकृत एजेंसियों के माध्यम से उचित प्रबंधन सुनिश्चित करना होगा।

श्री अरुण व्यास ने बताया कि नए नियमों के तहत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया के लिए ऑनलाइन निगरानी और अनुश्रवण व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके माध्यम से कचरे के संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण व अंतिम निस्तारण की निगरानी को बढ़ावा मिलेगा और व्यवस्था में पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।

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