Rajasthan News: प्रदेश में वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा माल परिवहन के दौरान नागौर और चित्तौड़गढ़ में की कर चोरी की कार्रवाई
Rajasthan News: प्रदेश में वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा माल परिवहन के दौरान नागौर और चित्तौड़गढ़ में की कर चोरी की कार्रवाई
छोटा अखबार।
वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा माल परिवहन के दौरान ई-वे बिल, वैध कर चालान और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की अनिवार्यता सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रभावी जांच व प्रवर्तन कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में नागौर और चित्तौड़गढ़ जिलों में विभागीय अधिकारियों द्वारा विभिन्न मार्गों पर वाहनों की जांच के दौरान कर दस्तावेजों में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।
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| AI Photo |
नागौर सर्किल में एक वाहन दिल्ली से बेंगलुरु की ओर सिंथेटिक फ्लेवरिंग एसेंस का परिवहन कर रहा था। जांच के दौरान वाहन में माल के साथ वैध इनवॉइस और ई-वे बिल उपलब्ध नहीं पाया गया। ड्राइवर द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार माल का मूल्य 70,800 रुपए व कर राशि 10,800 रुपए दर्शाई गई थी। प्रकरण में भौतिक सत्यापन के दौरान माल का मूल्य 15.18 लाख निर्धारित किया गया। प्रकरण में विभाग द्वारा कार्रवाई करते हुए 5,46,480 की आईजीएसटी पेनल्टी निर्धारित की गई, जिसे अधिकृत प्रतिनिधि द्वारा जमा कराया गया।
वहीं नागौर सर्किल में ही अमरपुरा क्षेत्र में वाहन संख्या RJ19GL9100 को जांच के लिए रोका गया। वाहन जोधपुर से बागपत की ओर जीरा व सरसों का परिवहन कर रहा था। जांच करने पर वाहन के साथ ई-वे बिल उपलब्ध नहीं पाया गया। प्रस्तुत बिल के अनुसार माल का कर-पूर्व मूल्य 25.15 लाख और कर राशि 1,25,750 थी। विभाग ने दोनों संबंधित फर्मों की प्रारंभिक जांच की और वर्तमान में माल का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। सत्यापन के पश्चात माल के वास्तविक बाजार मूल्य व कर देयता का निर्धारण किया जाएगा।
चित्तौड़गढ़ सर्किल के पालखेड़ी NH-48 पर विभाग ने वाहन संख्या RJ27GD6565 को रोका। वाहन दिल्ली से अहमदाबाद की ओर SS Utensils एवं Electronic Items लेकर जा रहा था। विभागीय अधिकारियों द्वारा भौतिक सत्यापन और दस्तावेजों की जांच करने पर कई विसंगतियां सामने आईं। बिल में घोषित मात्रा की तुलना में 18 गैस स्टोव और 48 लीटर सोल्डरिंग फ्लक्स अतिरिक्त पाया गया और 24 बिलों में बोवेब पोर्टल के अनुसार अमान्य प्राप्तकर्ताओं का विवरण पाया गया व 9 मामलों में आपूर्तिकर्ताओं द्वारा ई-इनवॉइस जारी नहीं किए जाने की बात सामने आई। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि कुछ बिलों का मूल्य कम दर्शाया गया है, जिससे ई-वे बिल जनरेशन की देयता से बचने की आशंका बनी है। प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार माल का कर योग्य मूल्य 4,22,940 था, जबकि प्रकरण में विभाग द्वारा 9,30,300 की संभावित कर राशि निर्धारित की गई है। प्रकरण में आगे की जांच और नियमानुसार कार्रवाई जारी है।
वाणिज्यिक कर विभाग ने स्पष्ट किया गया कि माल के अंतरराज्यीय व राज्य के भीतर परिवहन के दौरान ई-वे बिल, वैध टैक्स इनवॉइस, ई-इनवॉइस और वास्तविक माल की मात्रा व मूल्य में पारदर्शिता सुनिश्चित करना अनिवार्य है। विभागीय प्रवर्तन दलों द्वारा प्रमुख राजमार्गों व संवेदनशील मार्गों पर वाहनों की जांच लगातार की जा रही है।

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