Rajasthan News: पचपदरा में किसान के 5 लाख रुपये, दीमक ने किये चट
Rajasthan News: पचपदरा में किसान के 5 लाख रुपये, दीमक ने किये चट
छोटा अखबार।
राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा क्षेत्र से एक ऐसी हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है, जिसमें किसान के 5 लाख रुपये, दीमक ने चट कर दिये। घटना के अनुसार एक किसान ने अपनी जमीन का एक टुकड़ा बेचकर मिली लाखों रुपये को चोर और लुटेरों से सुरक्षित रखने के लिए बैंक के बजाय अपने ही खेत की मिट्टी में दबा दिया था। किसान का सोचना था कि मिट्टी के नीचे उसकी यह पूंजी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी, लेकिन कुदरत और समय का चक्र ऐसा घूमा कि जब तक उसे वह रकम वापस मिली, तब तक उसे इसकी बहुत बड़ी और दर्दनाक कीमत चुकानी पड़ चुकी थी। मिट्टी के भीतर दबी इस रकम को दीमक ने इस कदर अपना निवाला बनाया कि पूंजी का करीब 75 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह नष्ट हो चुका है।
यह अजीबोगरीब मामला बालोतरा जिले के पचपदरा थाना क्षेत्र का है, किसान मांगीलाल मेघवाल के साथ यह वाकया संज्ञान में आया। राजस्थान के बैंकिंग और अपराध इतिहास में संभवतः यह अपनी तरह का पहला और बेहद अनोखा मामला माना जा रहा है, जिसने वित्तीय साक्षरता और पारंपरिक तौर-तरीकों के बीच के बड़े अंतर को उजागर कर दिया है। घटना की पृष्ठभूमि कुछ समय पुरानी है। किसान ने हाल ही में अपने एक प्लॉट का सौदा किया था, जिससे उन्हें पांच लाख रुपये की नकद राशि प्राप्त हुई थी। आजकल समाज में बढ़ती चोरियों और लूटपाट की वारदातों से डरे मांगीलाल के मन में एक अजीब सा भय घर कर गया था। उन्हें लगा कि यदि वे इस भारी-भरकम नकद राशि को अपने घर में रखेंगे, तो चोरों की नजर इस पर पड़ सकती है और उनकी मेहनत की यह कमाई एक झटके में गायब हो सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर लोगों का बैंकों की जटिल प्रक्रियाओं से बचने और नकदी को अपने पास रखने का चलन होता है, इसी मानसिकता के तहत मांगीलाल ने बैंक में खाता होने या वहाँ पैसे जमा कराने के बजाय एक आत्मघाती कदम उठा लिया।
मांगीलाल ने किसी को बताए बिना इस पांच लाख रुपये की नकद राशि को एक साधारण पॉलिथीन की थैली में भरा। इसके बाद वे अपने सुनसान खेत में गए और वहाँ जमीन में एक गहरा गड्ढा खोदकर उस थैली को मिट्टी के नीचे अच्छी तरह दबा दिया। उन्होंने सोचा कि फसल कटने या जरूरत पड़ने पर वे इसे चुपचाप निकाल लेंगे और किसी को कानों-कान खबर भी नहीं होगी। पैसे दबाने के कुछ समय बाद मांगीलाल के जीवन में तब एक बड़ा मोड़ आया, जब वे उस सटीक जगह को ही भूल गए जहाँ उन्होंने पैसों से भरी थैली गाड़ी थी। दरअसल, खेत का दायरा काफी बड़ा था और जमीन समतल होने के कारण वहाँ कोई ऐसा विशिष्ट निशान नहीं बचा था जिससे उस जगह की पहचान की जा सके। जब मांगीलाल को पैसों की जरूरत महसूस हुई और वे खेत में उसे निकालने पहुंचे, तो लाख कोशिशों के बाद भी उन्हें वह जगह नहीं मिली। उन्होंने अकेले ही खेत के कई हिस्सों को खोदा, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। इसके बाद घबराए किसान ने अपने परिवार के सदस्यों को पूरी कहानी बताई। पहले तो परिवार को उनकी इस बात पर भरोसा ही नहीं हुआ, लेकिन मांगीलाल की गंभीर हालत और मानसिक तनाव को देखकर परिजनों ने भी खेत में पैसों की तलाश शुरू कर दी। दिन-रात की कड़ी मशक्कत के बावजूद पांच लाख रुपये से भरी वह थैली मिट्टी के भीतर कहीं गुम हो चुकी थी। महीनों का समय बीत गया और परिवार ने मान लिया था कि अब वह रकम कभी वापस नहीं मिलेगी। इसी बीच इलाके में बारिश का मौसम शुरू हुआ और खेतों में बुवाई व जुताई का काम शुरू हुआ। किसान मांगीलाल का बेटा और पत्नी जब ट्रैक्टर और पारंपरिक हलों के जरिए खेत की गहरी जुताई कर रहे थे, तभी अचानक मिट्टी पलटने के दौरान एक फटी हुई पॉलिथीन की थैली ऊपर आ गई।
थैली को देखते ही वहाँ मौजूद परिजनों की धड़कनें तेज हो गईं। उन्हें लगा कि आखिरकार उनकी डूबी हुई किस्मत वापस मिल गई है और खोई हुई पांच लाख रुपये की रकम सुरक्षित हाथ आ गई है। किसान मांगीलाल को भी तुरंत खेत पर बुलाया गया। लेकिन जैसे ही उस थैली की गांठ को खोला गया, वहाँ मौजूद सभी लोगों के पैरों तले से जमीन खिसक गई। थैली के भीतर का दृश्य उनकी उम्मीदों और खुशियों के बिल्कुल विपरीत था। मिट्टी के नीचे नमी और उमस के कारण पॉलिथीन के भीतर दीमकों का एक बड़ा साम्राज्य स्थापित हो चुका था। नोटों के बंडलों की हालत देखकर किसान मांगीलाल फूट-फूट कर रोने लगे। थैली में रखी करीब 75 प्रतिशत से अधिक रकम को दीमक पूरी तरह चाट चुकी थी। 500-500 रुपये के नोटों के बंडल गलकर मिट्टी में तब्दील हो चुके थे। कई नोटों के केवल छोटे-छोटे टुकड़े और कतरनें ही बची थीं, जिन्हें छूते ही वे राख की तरह बिखर रहे थे। मेहनत और जमीन के सौदे से जुटाई गई जो पांच लाख रुपये की मोटी रकम कभी परिवार का भविष्य संवार सकती थी, वह अब महज रद्दी और मिट्टी का ढेर बन चुकी थी।पचपदरा के स्थानीय लोगों के बीच यह घटना इस समय सबसे बड़ी चर्चा का विषय बनी हुई है। इस घटना ने ग्रामीण भारत में आज भी मौजूद वित्तीय साक्षरता की भारी कमी को उजागर किया है। सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा लगातार चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों के बावजूद, आज भी कई ग्रामीण अपनी गाढ़ी कमाई को बैंकों में जमा करने के बजाय घरों में या इस तरह के असुरक्षित तरीकों से रखने पर भरोसा करते हैं। यदि मांगीलाल ने वह रकम अपने नजदीकी बैंक खाते में जमा कराई होती, तो न केवल उनकी रकम पूरी तरह सुरक्षित रहती, बल्कि उस पर उन्हें ब्याज भी मिलता। लेकिन एक गलत फैसले और अंधविश्वास या अत्यधिक डर के कारण उन्हें जीवनभर का कभी न भूलने वाला सदमा झेलना पड़ा है।
अब पीड़ित किसान इस उम्मीद में फटे-कटे नोटों के अवशेषों को लेकर बैंकों के चक्कर काट रहा है कि शायद रिजर्व बैंक के नियमों के तहत कुछ प्रतिशत रकम बदली जा सके, लेकिन नोटों की अत्यधिक खराब स्थिति को देखते हुए इसकी संभावना भी बेहद कम नजर आ रही है। यह घटना पूरे प्रदेश के किसानों और आम लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी और सबक है कि अपनी मेहनत की कमाई को हमेशा सुरक्षित बैंकिंग प्रणाली में ही रखें।

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