Rajasthan News: प्रदेश में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुधार ने के लिये राजस्थान कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण नीति-2026 को मिली मंजूरी
Rajasthan News: प्रदेश में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुधार ने के लिये राजस्थान कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण नीति-2026 को मिली मंजूरी
छोटा अखबार।
भजनलाल शर्मा सरकार ने प्रदेश के किसानों को समृद्ध बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने के लिये ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में शुक्रवार को आयोजित हुई मंत्रिमंडल और मंत्रिपरिषद की उच्च स्तरीय चर्चा में 'राजस्थान कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण नीति-2026'को मंजूरी दे दी है। इस नई नीति का मुख्य उद्देश्य कृषि और बागवानी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश को आकर्षित करना, फसलों का मूल्य संवर्धन करना और किसानों की आय को दोगुना करना है। कैबिनेट चर्चा के फैसलों की जानकारी देते हुए उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने पत्रकारों को बताया कि यह नीति राजस्थान के ग्रामीण परिदृश्य को बदलने और कृषि आधारित उद्योगों के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार करने में मील का पत्थर साबित होगी।
श्री राठौड़ ने कहा कि राजस्थान एक कृषि प्रधान राज्य है, जहां की एक बड़ी आबादी आजीविका के लिए खेती और पशुपालन पर निर्भर है। नई नीति के माध्यम से सरकार का प्रयास है कि ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को खेती से जोड़कर उन्हें उद्यमी बनाया जाए। उन्होने कहा कि इस नीति के लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में नए स्टार्टअप और प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना होगी। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि शहरों की तरफ होने वाले पलायन में भी कमी आएगी। ग्रामीण युवा अब अपने ही क्षेत्र में रहकर कृषि व्यवसायों का संचालन कर सकेंगे।
मंत्री ने बताया कि वर्तमान में उचित प्रसंस्करण सुविधाओं के अभाव में किसानों को अपनी उपज का सही मूल्य नहीं मिल पाता है और कई बार फसलें बर्बाद हो जाती हैं। 'राजस्थान कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण नीति-2026' से इस समस्या का स्थाई समाधान होगा। नीति से फल, सब्जी, मसाले, अनाज, तिलहन और दलहन जैसी मुख्य फसलों के प्रसंस्करण को बढ़ावा दिया जाएगा। जब फसलों को सीधे बेचने के बजाय उन्हें प्रोसेस करके बाजार में उतारा जाएगा, तो उनका मूल्य कई गुना बढ़ जाएगा। इसका सीधा आर्थिक लाभ प्रदेश के किसानों की जेब तक पहुंचेगा।
इस महत्वाकांक्षी नीति के दायरे में कृषि और उससे जुड़े लगभग सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों को शामिल किया गया है। सरकार इन क्षेत्रों में नई इकाइयां लगाने के लिए विशेष प्रोत्साहन और रियायतें प्रदान करेगी।
श्री राठौड़ ने कहा कि राज्य में पैदा होने वाले फल-सब्जियों को खराब होने से बचाने के लिए प्रोसेसिंग यूनिट्स की स्थापना। राजस्थान के प्रसिद्ध मसालों और खाद्यान्नों की गुणवत्ता सुधारने और पैकेजिंग के लिए उद्योग। राज्य में तेल मिलों और दाल मिलों के आधुनिकीकरण को प्रोत्साहन।औषधीय पौधों (जैसे इसबगोल, एलोवेरा) और जनजातीय क्षेत्रों की वन उपज का व्यावसायिक उपयोग। डेयरी सेक्टर को मजबूत करने के लिए आधुनिक मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट और उच्च गुणवत्ता वाले पशु आहार निर्माण इकाइयां। साइलोज और कोल्ड स्टोरेजनीति की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें केवल फैक्ट्रियां लगाने पर ही जोर नहीं दिया गया है, बल्कि कृषि क्षेत्र की बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं को भी प्राथमिकता दी गई है। फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के लिए राज्यभर में आधुनिक साइलोज और कोल्ड स्टोरेज की चेन विकसित की जाएगी। इससे किसान अपनी उपज को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकेंगे और बाजार में सही दाम मिलने पर ही उसे बेचेंगे।
भजनलाल सरकार की इस नीति में खेत से लेकर बाजार तक की पूरी कड़ियों को जोड़ने का खाका तैयार किया गया है। राज्य की सप्लाई चेन को आधुनिक तकनीक से सुदृढ़ किया जाएगा ताकि खेतों से कच्चा माल बिना किसी देरी के सीधे प्रसंस्करण इकाइयों और बाजारों तक पहुंच सके। इसके अलावा, प्रोसेस्ड एग्रो प्रोडक्ट्स की ब्रांडिंग और प्रभावी विपणन की व्यवस्था की जाएगी। राजस्थान के इन कृषि उत्पादों को न केवल देश के बड़े महानगरों बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए निर्यात प्रोत्साहन नीतियां भी इस योजना का हिस्सा होंगी।
उद्योग मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार राजस्थान को कृषि निवेश का हब बनाना चाहती है। इसके लिए देश और विदेश के बड़े निवेशकों को आमंत्रित किया जाएगा। नीति के तहत निवेशकों को वित्तीय सब्सिडी, बिजली-पानी की दरों में छूट, भूमि आवंटन में प्राथमिकता और टैक्स में राहत जैसे कई आकर्षक लाभ दिए जाएंगे। वहीं उद्योग लगाने की प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम को और अधिक मजबूत किया जाएगा, जिससे निवेशकों को लालफीताशाही से मुक्ति मिले।

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