One State-One Election News: राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव होंगे एक साथ, कैबिनेट से मिली हरी झंडी

One State-One Election News: राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव होंगे एक साथ, कैबिनेट से मिली हरी झंडी  


छोटा अखबार।

भजनलाल सरकार ने प्रदेश में चुनावी सुधारों और विकास की गति को तेज करने की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में प्रदेश के आगामी पंचायती राज और स्थानीय निकाय चुनावों को ‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ की अवधारणा पर एक साथ कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। वहीं राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के लिये आयोग की सिफारिशों को भी स्वीकार करते हुए स्थानीय चुनावों में एससी और एसटी के साथ-साथ ओबीसी वर्ग के आरक्षण का मार्ग भी पूरी तरह साफ हो गया है। कैबिनेट में वार्ता के बाद आयोजित प्रेसवार्ता में उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चन्द बैरवा, उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ और संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने संयुक्त रूप से इन बड़े फैसलों की जानकारी मीडिया से साझा की है। 

संचार माध्यमों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि प्रदेश में पंचायती राज और स्थानीय निकाय चुनाव अलग-अलग समय पर होने के कारण बार-बार आदर्श आचार संहिता लागू करनी पड़ती है। इससे सरकारी मशीनरी लंबे समय तक चुनावी ड्यूटी में व्यस्त रहती है और प्रदेश के नीतिगत फैसलों सहित विकास कार्यों की गति पर बेहद प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इस समस्या के स्थायी समाधान, धन की बर्बादी को रोकने, श्रम और समय की बचत के उद्देश्य से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने वर्ष 2024-25 के बजट में ही नगरीय निकाय और पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव ‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ की तर्ज पर एक साथ करवाने की घोषणा की थी। कैबिनेट ने अब इस बजट घोषणा के क्रियान्वयन पर अपनी आधिकारिक मुहर लगा दी है। सरकार का मानना है कि इस कदम से बार-बार होने वाले चुनावी खर्चों में भारी कटौती होगी और प्रशासनिक अमला पूरी एकाग्रता के साथ जनता से जुड़े विकास कार्यों को समय पर पूरा कर सकेगा।

श्री पटेल ने एक और बड़ी सौगात की जानकारी देते हुए पत्रकारों को बताया कि राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग की बहुप्रतीक्षित अनुशंसाएं 5 अगस्त 2026 को राज्य सरकार को प्राप्त हो गई थीं। मंत्रिमंडल की चर्चा में बिना किसी देरी के इन महत्वपूर्ण सिफारिशों को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया है। इस फैसले के बाद अब नगरीय निकाय और पंचायत राज अधिनियम में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के साथ-साथ अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए भी राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आरक्षण का कानूनी प्रावधान सुनिश्चित हो गया है। सरकार के इस अनुमोदन के बाद अब संबंधित विभागों द्वारा इन आरक्षित वर्गों की सीटों के निर्धारण के लिए जल्द ही लॉटरी प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इससे आगामी चुनावों में सभी वंचित और पिछड़े वर्गों को उनकी आबादी और प्रतिनिधित्व के अनुसार उचित भागीदारी मिल सकेगी। 

उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने भी इस दौरान संबोधित करते हुए कहा कि यह सरकार केवल चुनावी राजनीति में विश्वास नहीं रखती, बल्कि व्यवस्थागत सुधारों के जरिए आमजन के जीवन को सुगम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। 'वन स्टेट-वन इलेक्शन' की अवधारणा को धरातल पर उतारने वाला राजस्थान देश के अग्रणी राज्यों में शुमार हो गया है। इससे न केवल जनता का समय बचेगा, बल्कि मतदान प्रतिशत में भी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है क्योंकि मतदाता एक ही समय पर अपने स्थानीय जनप्रतिनिधियों का चुनाव कर सकेंगे।

वहीं उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चन्द बैरवा ने कहा कि ओबीसी आयोग की सिफारिशों को लागू करना सामाजिक न्याय की दिशा में हमारी सरकार का एक बड़ा कदम है। लॉटरी प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा ताकि चुनाव तय समय पर सुचारू रूप से संपन्न कराए जा सकें।

इस दौरान मंत्रियों ने स्पष्ट किया कि इस दोहरे नीतिगत फैसले को लागू करने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग के साथ मिलकर प्रशासनिक और तकनीकी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। चुनावी नियमावलियों, मतदाता सूचियों के एकीकरण और ईवीएम प्रबंधन को लेकर भी रूपरेखा तैयार की जा रही है। 

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