Jaipur News: जयपुर के पुरोहित जी का कटला में हुए भीषण अग्निकांड में लापरवाही बरतने वाले दो अधिकारी निलंबित
Jaipur News: जयपुर के पुरोहित जी का कटला में हुए भीषण अग्निकांड में लापरवाही बरतने वाले दो अधिकारी निलंबित
छोटा अखबार।
जयपुर के पुरोहित जी का कटला में हुए भीषण अग्निकांड के बाद राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। लापरवाही के मामले को देखते हुए सरकार ने जयपुर नगर निगम के मुख्य अग्निशमन अधिकारी देवेंद्र मीणा और सहायक अग्निशमन अधिकारी कुलदीप माणतवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वहीं मामले की निष्पक्ष और गहन जांच के लिए स्वायत्त शासन विभाग द्वारा तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन किया गया है।
जयपुर के व्यस्ततम और ऐतिहासिक त्रिपोलिया बाजार के पुरोहित जी का कटला क्षेत्र में स्थित सेठी कॉम्प्लेक्स में 17 सितंबर को अचानक बेहद भीषण आग लग गई थी। संकरी गलियों और भारी भीड़भाड़ वाले इस व्यावसायिक क्षेत्र में लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। इस हादसे के बाद बाजार में अफरा-तफरी मच गई और फायर सेफ्टी के दावों की पोल खुल गई। घटना के तुरंत बाद जब स्थानीय प्रशासन और सरकार ने मामले की प्रारंभिक समीक्षा की, तो अग्निशमन विभाग की घोर लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के संकेत मिले। इसी के चलते राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों बड़े अधिकारियों के निलंबन के आदेश जारी किए। सरकार ने केवल निलंबन तक ही अपनी कार्रवाई को सीमित नहीं रखा है, बल्कि पूरे मामले की तथ्यात्मक जांच के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
स्वायत्त शासन विभाग द्वारा गठित तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी की संरचना इस प्रकार है:
अध्यक्ष: निदेशालय स्थानीय निकाय विभाग के अतिरिक्त निदेशक।
सदस्य: स्वायत्त शासन विभाग के मुख्य अभियंता।
सदस्य: नगर निगम उदयपुर के मुख्य अग्निशमन अधिकारी।
यह कमेटी एक निष्पक्ष दृष्टिकोण के साथ पूरे घटनाक्रम की पड़ताल करेगी ताकि स्थानीय प्रभावों से मुक्त होकर सच सामने आ सके।
जांच दल को घटनास्थल का विस्तृत भौतिक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। कमेटी मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी:
आग लगने के वास्तविक कारण: सेठी कॉम्प्लेक्स में आग किन परिस्थितियों में लगी और इसे समय रहते काबू क्यों नहीं पाया जा सका।
भवन की स्वीकृति और उपयोग: क्या कॉम्प्लेक्स का निर्माण स्वीकृत नक्शे और नियमों के अनुसार हुआ था, या फिर वहां किसी प्रकार का अवैध निर्माण और व्यावसायिक दुरुपयोग किया जा रहा था।
फायर एनओसी का रिकॉर्ड: भवन के पास वैध फायर अनापत्ति प्रमाण पत्र था या नहीं। यदि था, तो क्या वहां लगाए गए अग्निशमन उपकरण चालू हालत में थे।
पुरोहित जी का कटला जयपुर का एक प्रमुख कपड़ा बाजार है, जहां रोजाना हजारों की संख्या में लोग खरीदारी के लिए आते हैं। इस हादसे ने परकोटे के भीतर स्थित सैकड़ों व्यावसायिक इमारतों में अग्नि सुरक्षा के इंतजामों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय व्यापारियों और आम जनता में भी इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि यदि यह आग और फैल जाती तो जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता था।
सरकार की इस त्वरित और सख्त कार्रवाई से साफ है कि भविष्य में फायर सेफ्टी के नियमों में कोताही बरतने वाले अधिकारियों और भवन स्वामियों को बख्शा नहीं जाएगा। कमेटी से जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है, जिसके आधार पर आने वाले दिनों में कुछ और बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

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