Rajasthan News: 17 और 18 सितंबर को तय होगी पंचायत चुनाव की आरक्षित सीटें सजेगें चौपाल
Rajasthan News: 17 और 18 सितंबर को तय होगी पंचायत चुनाव की आरक्षित सीटें सजेगें चौपाल
छोटा अखबार।
नगरपालिका चुनावों की गहमागहमी थमने के बाद अब ग्रामीण इलाकों में सियासी हलचल बढने लगी है। जनता की नजरें अब पूरी तरह पंचायत चुनावों पर टिक गई हैं। गांवों में चुनावी चौपालें सजने लगी हैं और हर नुक्कड़ पर बस एक ही चर्चा है—किसके गांव में किस वर्ग का सरपंच बनेगा? कौन सा वार्ड किस वर्ग के लिए आरक्षित होगा? इन सभी सवालों और उत्सुकता पर से अगले दो दिनों में पूरी तरह पर्दा हटने वाला है।
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| AI Photo |
प्रशासनिक तैयारियों के अनुसार आरक्षण की यह प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाएगी। 17 सितंबर को पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य पदों के लिए लॉटरी निकाली जाएगी। इसके ठीक अगले दिन 18 सितंबर को सरपंच और पंच पदों के लिए आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होगी। होने वाली लॉटरी प्रक्रिया पर न केवल मतदाताओं की, बल्कि उन तमाम संभावित उम्मीदवारों की सांसें अटकी हुई हैं जो महीनों से जमीन तैयार कर रहे थे।
लॉटरी की तारीख नजदीक आते ही दावेदारों की गांवों की चौपालो और थड़ियों पर चुनावी गुणा-भाग तेज हो गया है। कई सामान्य सीटों पर तैयारी कर रहे दिग्गजों को डर है कि कहीं उनका वार्ड या ग्राम पंचायत किसी अन्य वर्ग के लिए आरक्षित न हो जाए। वहीं आरक्षित वर्ग के नए चेहरे इस उम्मीद में हैं कि इस बार भाग्य उनका साथ देगा और उन्हें चुनावी मैदान में उतरने का मौका मिलेगा। संभावित उम्मीदवार अभी से ही जातिगत और क्षेत्रीय समीकरणों को अपने पक्ष में बैठाने के लिए जोड़-तोड़ में जुट गए हैं।
इन दो दिनों में यह तय हो जाएगा कि किसकी महीनों की मेहनत और तैयारी जीत की रणनीति में बदलेगी और किसका चुनावी सपना सिर्फ एक सपना बनकर रह जाएगा। आरक्षण की स्थिति साफ होते ही कई दिग्गजों के सियासी समीकरण ताश के पत्तों की तरह ढह सकते हैं, तो कई नए चेहरों के लिए राजनीति के बंद दरवाजे अचानक खुल जाएंगे। ऐसे में 17 और 18 सितंबर की तारीखें ग्रामीण राजनीति के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाली हैं।किसके सिर सजेगा सरपंची का ताज?पंचायती राज व्यवस्था के तहत गांवों का विकास सीधे तौर पर सरपंच और वार्ड पंचों की कार्यप्रणाली पर निर्भर करता है। यही वजह है कि ग्रामीण जनता भी इस बार बेहद जागरूक नजर आ रही है। लोग सिर्फ आरक्षण की स्थिति साफ होने का इंतजार कर रहे हैं ताकि वे अपने गांव की तकदीर बदलने वाले सही उम्मीदवार का चयन कर सकें। अब देखना यह होगा कि लॉटरी के पिटारे से किस वर्ग का नाम निकलता है और आगामी दिनों में किसके सिर पर सरपंची का ताज सजता है। गांवों में चुनावी शंखनाद हो चुका है, और आने वाले दो दिन ग्रामीण सत्ता की नई पटकथा लिखने जा रहे हैं।

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