Jaipur News: विवाह की चाह में देश भर के कुंवारे युवक-युवतियों ने लगाई जयपुर के मोतीडूंगरी गणेशजी के ढोक, 3500 किलो मेहंदी भी पड़ी कम

Jaipur News: विवाह की चाह में देश भर के कुंवारे युवक-युवतियों ने लगाई जयपुर के मोतीडूंगरी गणेशजी के ढोक, 3500 किलो मेहंदी भी पड़ी कम


छोटा अखबार।

जयपुर के मोतीडूंगरी गणेशजी महाराज के दरबार में रविवार को आयोजित सिंजारा महोत्सव में आस्था और अनूठी चाहत का एक विहंगम दृश्य देखने को मिला। गणेश चतुर्थी पर्व की पूर्व संध्या पर आयोजित इस उत्सव में देश भर से आए हजारों कुंवारे युवक-युवतियों का हुजूम उमड़ पड़ा। मान्यता है कि सिंजारा के अवसर पर भगवान गणेश को अर्पित की गई विशेष मेहंदी को हाथों में लगाने से शीघ्र विवाह के योग बनते हैं और वैवाहिक मार्ग की सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं। इस बार सोशल मीडिया पर वायरल हुई रीलों ने युवाओं के बीच इस उत्सव को लेकर उत्सुकता को चरम पर पहुंचा दिया, जिसके कारण मंदिर के बाहर पैर रखने तक की जगह नहीं बची। 

फोटो दिनेश डाबी

डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पिछले कुछ दिनों से मोतीडूंगरी गणेशजी की इस चमत्कारी मेहंदी को लेकर कई वीडियो और रीलें जमकर वायरल हो रही थीं। इन वीडियो में दावा किया जा रहा था कि यहां की अभिमंत्रित मेहंदी लगाने से चट मंगनी और पट ब्याह हो जाता है। इस दावे ने देश के विभिन्न राज्यों के युवाओं को इस कदर आकर्षित किया कि दिल्ली, चंडीगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, फरीदाबाद, मध्य प्रदेश, पुणे, इंदौर, भोपाल, आगरा और उत्तर प्रदेश सहित देश के कोने-कोने से श्रद्धालु गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले ही जयपुर पहुंच गए।

रविवार को जयपुर में तेज धूप और भारी उमस का माहौल था, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था के आगे मौसम बेअसर साबित हुआ। मंदिर के बाहर स्थानीय निवासियों के साथ-साथ बाहरी राज्यों से आए कुंवारे युवक-युवतियां छह से सात घंटे तक लंबी-लंबी कतारों में अपनी बारी का इंतजार करते देखे गए। भीड़ का आलम यह था कि मेहंदी पाने की चाहत में सैकड़ों लोगों ने एक दिन पहले ही मंदिर के बाहर सड़क पर सोकर रात बिताई थी। श्रद्धालुओं की इस अभूतपूर्व भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रबंधन को भी अपनी व्यवस्थाओं में बदलाव करना पड़ा।

मोतीडूंगरी गणेश मंदिर के महंत कैलाश शर्मा के अनुसार, भगवान गणेश को सिंजारे पर मेहंदी अर्पित करने की यह परंपरा करीब 200 साल पुरानी है। शुरुआत में यह उत्सव बेहद छोटे स्तर पर केवल सवा किलो मेहंदी के साथ शुरू हुआ था, जो समय के साथ आज एक विशाल राष्ट्रीय उत्सव का रूप ले चुका है। इस वर्ष सिंजारा महोत्सव के लिए विश्व प्रसिद्ध मेहंदी नगरी 'सोजत' से विशेष रूप से करीब 3500 किलो शुद्ध मेहंदी मंगवाई गई थी। इस मेहंदी को मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान गणेश को अर्पित कर अभिमंत्रित किया गया था। समय से पहले शुरू हुआ वितरण, फिर भी घट गया प्रसादतय कार्यक्रम के अनुसार शाम को 7:30 बजे सिंजारा पूजन के बाद मेहंदी का वितरण शुरू होना था। लेकिन दोपहर से ही मंदिर के बाहर उमड़ती बेकाबू भीड़ और व्यवस्थाओं को बिगड़ते देख मंदिर प्रशासन ने जनहित में शाम 5:00 बजे से ही मेहंदी बांटना शुरू कर दिया। मंदिर के पांचों निकास द्वारों पर विशेष काउंटर बनाकर जिप वाले पैकेटों में मेहंदी वितरित की गई। हालांकि, श्रद्धालुओं की संख्या इतनी अधिक थी कि शाम 7:00 बजे तक आते-आते पूरी 3500 किलो मेहंदी समाप्त हो गई और मंदिर प्रबंधन को लाउडस्पीकर पर मेहंदी खत्म होने की आधिकारिक घोषणा करनी पड़ी। मेहंदी न मिल पाने से कई दूर-दराज से आए युवाओं के चेहरों पर निराशा भी देखी गई, लेकिन बप्पा के दर्शन कर उन्होंने अपनी मन्नत का धागा बांधा।

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