Urban Local Body Elections 2026: टिकटों की नग्नता और लोकतंत्र का मुजरा: जब मलाई के लिए घर ही बन गया रणक्षेत्र
Urban Local Body Elections 2026: टिकटों की नग्नता और लोकतंत्र का मुजरा: जब मलाई के लिए घर ही बन गया रणक्षेत्र छोटा अखबार। नगर निकाय चुनाव 2026 की यह चुनावी नौटंकी आज अपने अंतिम पड़ाव यानी नामांकन की आखिरी तारीख तक पहुँच चुकी है। भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही महा-दुकानों के शटर के पीछे इस समय वह 'अग्निपरीक्षा' चल रही है, जहाँ निष्ठा की सरेआम नीलामी हो रही है। टिकट वितरण ने दोनों पार्टियों के आलाकमान की पैंट ढीली कर दी है। वे समझ नहीं पा रहे कि किस वफादार को लात मारें और किस बागी के तलवे चाटें। भीतरघात और बगावत का बारूद इस कदर बिछा है कि आज शाम होते-होते दोनों ही दलों के दफ्तरों से वफादारी की अर्थियाँ उठना तय है। AI Photo इस चुनाव का सबसे कड़वा और मजेदार सच यह है कि आज गली का 'जणा-जणा' अचानक खुद को वॉर्ड का होने वाला 'सुल्तान' समझने लगा है। समाज सेवा का भूत सबके सिर पर इस तरह सवार है कि हर कोई 'सत्ता की मलाई' चाटने को इस कदर आतुर है मानो वॉर्ड पार्षद का पद नहीं, बल्कि कुबेर के खजाने का सीधा लाइसेंस मिल रहा हो। जनता की भलाई जाए तेल लेने, कार्यकर्ताओं को तो ब...