Rajasthan News: हनुमानगढ़ में किसानों को अनुदान न मिलने पर बैरिकेड्स तोड़ निकाली ट्रैक्टर रैली
Rajasthan News: हनुमानगढ़ में किसानों को अनुदान न मिलने पर बैरिकेड्स तोड़ निकाली ट्रैक्टर रैली
छोटा अखबार।
अटल भूजल योजना के तहत निर्मित डिग्गियों की अनुदान राशि का भुगतान को लेकर हनुमानगढ़ के किसानों ने बुधवार को बैरिकेड्स तोड़ कर ट्रैक्टर रैली निकाली। वहीं रैली के लिये प्रशासन ने अनुमति नहीं की। आक्रोशित किसानों ने टाउन धानमंडी से एक विशाल ट्रैक्टर रैली निकाली और किसानों को रोकने का प्रयास कर रही पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनातनी हो गई। माहौल उस समय बेहद तनावपूर्ण हो गया जब किसानों ने पुलिस द्वारा लगाए गए भारी बैरिकेड्स को ट्रैक्टरों की मदद से तोड़ दिया और आगे बढ़ गए।
किसानों ने अपनी पूर्व घोषणा के तहत टाउन धानमंडी में एकत्रित होकर ट्रैक्टर मार्च की शुरुआत की। किसानों के आंदोलन और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए थे। पुलिस ने धानमंडी से बाहर निकलने वाले सभी रास्तों पर मजबूत लोहे के बैरिकेड्स लगाकर पूरी तरह बंद कर दिया था। भारी संख्या में पुलिस बल तैनात था, लेकिन जैसे ही ट्रैक्टरों का काफिला आगे बढ़ा, किसान रुकने को तैयार नहीं हुए। किसानों ने ट्रैक्टरों की ताकत के आगे पुलिसिया घेराबंदी को ध्वस्त कर दिया। बैरिकेड्स टूटने से मौके पर अफरा-तफरी मच गई और पुलिस व किसानों के बीच खींचतान और गरमा-गरमी चलती रही।
उग्र आंदोलन को देखते हुए प्रशासन पहले से ही सतर्क था। मौके पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस उप अधीक्षक मीनाक्षी सहारण, टाउन थाना प्रभारी लखवीर सिंह गिल और महिला थाना प्रभारी चन्द्रकला खुद कमान संभाले हुए थे। कई थानों के जाप्ते के साथ-साथ रिजर्व पुलिस लाइन से अतिरिक्त बल भी तैनात किया गया था। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना रहा था कि क्षेत्र में चुनाव की आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण ट्रैक्टर मार्च और प्रदर्शन की आधिकारिक अनुमति नहीं दी गई थी। फिर भी किसानों ने अपनी आर्थिक बदहाली का हवाला देते हुए इस प्रतिबंध को दरकिनार कर दिया।
रैली के दौरान किसान नेताओं का कहना था कि यह आंदोलन कोई शौक नहीं, बल्कि उनकी मजबूरी है। किसानों ने आरोप लगाया कि उन्होंने सरकार की अटल भूजल योजना पर भरोसा करके अपने खेतों में डिग्गियों का निर्माण करवाया था। सरकार ने इस पर अनुदान देने का वादा किया था, लेकिन निर्माण कार्य पूरा हुए दो साल से अधिक का समय बीत चुका है और आज तक एक रुपया भी उनके खातों में नहीं आया है। किसानों ने कहा कि डिग्गी निर्माण के लिए उन्होंने अपनी जमा-पूंजी तो लगाई ही और कर्ज भी लिया था। कई छोटे और सीमांत किसानों ने डिग्गी बनवाने के लिए अपनी पुश्तैनी जमीन और घर की महिलाओं के गहने तक गिरवी रख दिए या साहूकारों से ऊंचे ब्याज पर उधार लिया। अब दो साल से अनुदान राशि न मिलने के कारण कर्ज पर ब्याज लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे वे गहरे आर्थिक संकट में फंस गए हैं। बैंक और साहूकार उन पर पैसे लौटाने का दबाव बना रहे हैं, जिससे किसानों के सामने मानसिक और आर्थिक रूप से टूटने की नौबत आ गई है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी रुकी हुई अनुदान राशि जारी नहीं की गई, तो यह आंदोलन और उग्र रूप लेगा।

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