C M NEWS: धरातल पर उतरने को तैयार यमुना जल परियोजना, डीपीआर को मिली हाइड्रोलॉजी और अंतरराज्यीय मंजूरियां

C M NEWS: धरातल पर उतरने को तैयार यमुना जल परियोजना, डीपीआर को मिली हाइड्रोलॉजी और अंतरराज्यीय मंजूरियां


छोटा अखबार।

प्रदेश की महत्वाकांक्षी यमुना जल परियोजना के क्रियान्वयन की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है। प्रदेश के सूखाग्रस्त और पानी की कमी से जूझ रहे क्षेत्रों की तस्वीर बदलने वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के लिए सबसे जरूरी हाइड्रोलॉजी और अंतरराज्यीय स्वीकृतियां आधिकारिक तौर पर जारी हो गई हैं। यह जानकारी सोमवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान सामने आई। मुख्यमंत्री ने यमुना जल परियोजना की वर्तमान प्रगति और आगामी कार्ययोजना की गहन समीक्षा की।  

मुख्यमंत्री ने कहा कि आवश्यक तकनीकी और अंतरराज्यीय स्वीकृतियां मिलना राजस्थान के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने इसे प्रदेश के जल संसाधन विकास और प्रबंधन की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम बताया। उन्होने विश्वास जताया कि इन स्वीकृतियों के मिलने से परियोजना के विभिन्न निर्माण कार्यों को अभूतपूर्व गति मिलेगी। वहीं शेखावाटी सहित राजस्थान के चिन्हित क्षेत्रों में यमुना जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे भगीरथ प्रयासों को और अधिक मजबूती मिलेगी।

अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को जानकारी देते हुये बताया कि बीते 21 अगस्त, 2026 को नई दिल्ली स्थित केंद्रीय जल आयोग में यमुना जल परियोजना की डीपीआर की विस्तृत और गहन समीक्षा की जा चुकी है। इस पर त्वरित संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने परियोजना के कंसल्टेंट 'नेबकॉन' के विशेषज्ञों और जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को निरंतर आपसी समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी स्तरों पर प्रभावी पैरवी करते हुए डीपीआर के अंतिम अनुमोदन की प्रक्रिया को तेज गति से आगे बढ़ाया जाए, ताकि मैदानी स्तर पर काम जल्द शुरू हो सके।

परियोजना के जमीनी क्रियान्वयन से जुड़े बुनियादी ढांचे की जानकारी देते हुए जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय कुमार ने बताया कि परियोजना के अंतर्गत पानी के भंडारण के लिए हॉसियावास (चूरू) में तीन बड़े जलाशयों का निर्माण प्रस्तावित है। इनमें से धनोटी जलाशय के निर्माण के लिए निविदा पहले ही जारी की जा चुकी है। 

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि 29 जून, 2026 को केंद्र सरकार, राजस्थान और हरियाणा के बीच हुए ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन की शर्तों के अनुरूप परियोजना को गति देने के लिए विशेष प्रयोजन वाहन यानी एसपीवी के गठन का प्रस्ताव शीघ्र राज्य सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। 

आपको बतादें कि यह परियोजना वर्ष 1994 के यमुना जल बंटवारे के समझौते के तहत राजस्थान को आवंटित उसके हिस्से के पानी को पाइपलाइन के माध्यम से लाने के लिए तैयार की जा रही है। इस परियोजना के पूर्ण होने से राजस्थान के चूरू, सीकर और झुंझुनू शेखावाटी अंचल के जिलों में पेयजल की किल्लत हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी। भूमिगत पाइपलाइन प्रणाली से आने वाले पानी को विशाल जलाशयों में संचित किया जाएगा, जिससे क्षेत्र का भूजल स्तर भी सुधरेगा। लगभग तीन दशकों से लंबित इस विवाद के सुलझने और अब डीपीआर प्रक्रिया में आई इस तेजी से स्थानीय किसानों, उद्योगों और आम जनता में समृद्धि और सुनहरे भविष्य की नई उम्मीद जगी है।

Comments

Popular posts from this blog

सरकार का सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग फेल, रुपयों में छपवानी पड़ रही है, बजट घोषणा की प्रेस विज्ञप्ती

देश में 10वीं बोर्ड खत्म, अब बोर्ड केवल 12वीं क्‍लास में

आज शाम 7 बजे व्यापारी करेंगे थाली और घंटी बजाकर सरकार का विरोध

रीको में 238 पदों की होगी सीधी भर्ती सरकार के आदेश जारी 

ग्राम पंचायत स्तर पर युवाओं को मिलेगा रोजगार

फ़ार्मा कंपनियां डॉक्टरों को रिश्वत में लड़कियां उपलब्ध कराती हैं — प्रधानसेवक

मौलिक अधिकार नहीं है प्रमोशन में आरक्षण — सुप्रीम कोर्ट

10वीं और 12वीं की छात्राओं के लिऐ खुशखबरी, अब नहीं लगेगी फीस