Rajasthan News: ब्यावर से होगा राज्य स्तरीय लंपी रोग प्रतिरोधक टीकाकरण अभियान का आगाज़, पहली बार 'रांची स्ट्रेन' वैक्सीन का होगा इस्तेमाल
Rajasthan News: ब्यावर से होगा राज्य स्तरीय लंपी रोग प्रतिरोधक टीकाकरण अभियान का आगाज़, पहली बार 'रांची स्ट्रेन' वैक्सीन का होगा इस्तेमाल
छोटा अखबार।
प्रदेश में गोवंश को लंपी जैसी घातक बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत बुधवार को ब्यावर जिले के श्री तिजारती सर्राफान गौशाला से राज्य स्तरीय 'लंपी रोग प्रतिरोधक टीकाकरण अभियान' का विधिवत शुभारंभ करेंगे। दो महीने तक निरंतर चलने वाले इस विशेष अभियान के तहत प्रदेशभर के गोवंशीय पशुओं का टीकाकरण किया जाएगा।
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मंत्री कुमावत ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कुशल नेतृत्व में प्रदेश सरकार पशु कल्याण के लिए पूरी तरह समर्पित है। उन्होंने लंपी को एक जानलेवा संक्रामक रोग बताते हुए कहा कि पूर्व में राज्य का पशुपालक वर्ग इस बीमारी के कारण भारी नुकसान झेल चुका है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने समय से पहले सावधानी बरतते हुए नियंत्रण के पुख्ता इंतजाम किए हैं, जिसमें व्यापक टीकाकरण और जन-जागरूकता अभियान सबसे अहम हैं।
वहीं पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. सुरेशचंद मीना ने बताया कि अभियान की सफलता के लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर माइक्रो लेवल प्लानिंग तैयार की जा चुकी है। सभी संबंधित संस्थाओं को उनके कार्यक्षेत्र में मौजूद गोवंश की संख्या के आधार पर टीकाकरण के लक्ष्य सौंप दिए गए हैं। इस बार के अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि राज्य में पहली बार लंपी स्किन डिजीज से बचाव के लिए विशेष 'होमोलोगुस रांची स्ट्रेन' वैक्सीन का उपयोग किया जाएगा, जो पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में अत्यधिक प्रभावी है। सरकार की इस त्वरित पहल से पशुपालकों में सुरक्षा की एक नई उम्मीद जगी है।
क्या है 'होमोलोगुस रांची स्ट्रेन' वैक्सीन—
'होमोलोगुस रांची स्ट्रेन' वैक्सीन गायों में होने वाली लंपी स्किन बीमारी (LSD) के खिलाफ भारत का पहला पूरी तरह स्वदेशी और शत-प्रतिशत सटीक टीका है। इसे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के दो प्रमुख संस्थानों (NRCE हिसार और IVRI इज्जतनगर) ने मिलकर तैयार किया है।
इसे 'रांची स्ट्रेन' क्यों कहते हैं—
साल 2019 में जब भारत में लंपी का पहला मामला आया, तब वैज्ञानिकों ने झारखंड की राजधानी रांची में एक संक्रमित गाय के शरीर (त्वचा की गांठ) से इस वायरस का लाइव सैंपल निकाला था और मुख्य वायरस रांची से मिला था, इसलिए इसे 'रांची स्ट्रेन' नाम दिया गया।
वैक्सीन की सबसे बड़ी खासियतें—
यह एक DIVA (Differentiating Infected from Vaccinated Animals) वैक्सीन है। इसका फायदा यह है कि ब्लड टेस्ट के जरिए डॉक्टर यह आसानी से पता लगा सकते हैं कि गाय के शरीर में एंटीबॉडी वैक्सीन लगने से बनी हैं या वह सचमुच बीमार है और इस वैक्सीन की सिर्फ एक खुराक (Single Dose) गाय को कम से कम एक साल तक लंपी वायरस से पूरी तरह सुरक्षित रखती है। वहीं यह टीका दूध देने वाली, गर्भवती गायों और छोटे बछड़ों सभी के लिए पूरी तरह सुरक्षित और असरदार प्रमाणित हुआ है।


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