Rajasthan News: प्रदेश में 17-20 फरवरी को होगा 14वां इंडिया स्टोनमार्ट—2028

Rajasthan News: प्रदेश में 17-20 फरवरी को होगा 14वां इंडिया स्टोनमार्ट—2028


छोटा अखबार।

इंडिया स्टोनेमार्ट 2028 के आयोजन के लिए राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं विनियोजन निगम (रीको), सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ स्टोन्स (सिडोस) और लघु उद्योग भारती के मध्य मंगलवार को त्रि-पक्षीय एमओयू हस्ताक्षर किया गया। कॉन्स्टिट्यूशन क्लब, जयपुर में आयोजित कार्यक्रम में उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ सहित उद्योगपति मौजूद रहे। श्री राठौड़ ने बताया कि राजस्थान की राजधानी में आयोजित 'इंडिया स्टोनमार्ट 2026' ने वैश्विक व्यापार मंच के रूप में एक नया इतिहास रच दिया है। इस भव्य आयोजन की भारी सफलता के बाद अब इसके अगले संस्करण की घोषणा भी कर दी गई है। इंडिया स्टोनमार्ट का अगला संस्करण 17 से 20 फरवरी, 2028 को आयोजित किया जाएगा। आगामी आयोजन को और अधिक व्यापक बनाने के लिए दुनिया के 11 प्रमुख देशों में रोड शो किए जाएंगे, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिकॉर्ड सहभागिता सुनिश्चित की जा सके।

उन्होने बताया कि हाल ही में संपन्न हुए 'इंडिया स्टोनमार्ट 2026' में व्यापार और तकनीक का बेजोड़ संगम देखने को मिला। इस बार लगभग 45,000 वर्गमीटर का विशाल प्रदर्शनी क्षेत्र विकसित किया गया था। इस प्रदर्शनी में दुनिया भर के 450 से अधिक प्रदर्शकों ने अपने उत्पादों और तकनीकों का प्रदर्शन किया। वैश्विक स्तर पर आयोजन की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें 59 विदेशी कंपनियां शामिल हुईं। साथ ही तुर्किये, चीन और ईरान जैसे पत्थर उद्योग के अग्रणी देशों के 3 अंतरराष्ट्रीय कंट्री पवेलियन भी स्थापित किए गए।

मेले में विश्व के 8 देशों और भारत के 15 राज्यों से मजबूत भागीदारी देखने को मिली। विशेष बात यह रही कि गुजरात, मध्यप्रदेश, झारखंड और ओडिशा जैसे राज्यों ने पहली बार संगठित राज्य पवेलियन के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

चार दिवसीय इस आयोजन में 27,000 से अधिक आगंतुक पहुंचे, जिनमें 21,000 से अधिक विशुद्ध व्यापारिक (बिजनेस) विजिटर्स शामिल थे। दुनिया के 58 देशों से आए अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने यह साबित कर दिया है कि इंडिया स्टोनमार्ट अब केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि एक प्रतिष्ठित वैश्विक व्यापारिक मंच बन चुका है। इसके अलावा, आयोजन में 400 से अधिक आर्किटेक्ट्स और डिजाइन पेशेवरों ने भी हिस्सा लिया। उनकी इस सक्रिय भागीदारी ने साफ संकेत दिया है कि आने वाले समय में निर्माण और इंटीरियर डिजाइनिंग के क्षेत्र में प्राकृतिक पत्थरों की मांग और उपयोग की संभावनाएं तेजी से बढ़ने वाली हैं।

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