Rajasthan News: राजस्थान नगर निकाय चुनाव: पार्षद उम्मीदवारों के लिए 'नो ड्यूज सर्टिफिकेट' अनिवार्य, बकाया होने पर नहीं लड़ पाएंगे चुनाव
Rajasthan News: राजस्थान नगर निकाय चुनाव: पार्षद उम्मीदवारों के लिए 'नो ड्यूज सर्टिफिकेट' अनिवार्य, बकाया होने पर नहीं लड़ पाएंगे चुनाव
छोटा अखबार।
राजस्थान में आगामी नगर निकाय चुनावों को लेकर स्वायत्त शासन विभाग और नगर निगम प्रशासन ने उम्मीदवारों के लिए एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। अब पार्षद का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे इच्छुक उम्मीदवारों को नामांकन से पहले अपने सभी वित्तीय बकाये चुकाने होंगे। नए आदेश के तहत उम्मीदवारों को सबसे पहले अपने घर का बकाया नगरीय विकास कर (यूडी टैक्स) और नगर निगम का अन्य कोई भी बकाया जमा कराना अनिवार्य कर दिया गया है।
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बिना सर्टिफिकेट नामांकन नहीं-
नगर निगम प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, सभी जोन कार्यालयों को इस संबंध में सख्त निर्देश दे दिए गए हैं। चुनाव लड़ने वाले हर उम्मीदवार को अपने संबंधित जोन कार्यालय से 'नो ड्यूज सर्टिफिकेट' (अदेय प्रमाण पत्र) हासिल करना होगा। यदि किसी व्यक्ति पर यूडी टैक्स, गृह कर या निगम का कोई भी अन्य शुल्क बकाया पाया जाता है, तो उसका नो ड्यूज सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाएगा। इस सर्टिफिकेट के बिना उम्मीदवार चुनाव के लिए अपनी पात्रता पूरी नहीं कर पाएगा और उसका नामांकन रद्द हो सकता है।
निगम की राजस्व वसूली को मिलेगा बल-
प्रशासन के इस कदम का मुख्य उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और नगर निगमों के अटके हुए राजस्व की वसूली करना है। अक्सर देखा जाता है कि लोग टैक्स बकाया होने के बावजूद चुनाव मैदान में उतर जाते हैं। अब इस नए नियम से न केवल निकायों को करोड़ों रुपये का बकाया राजस्व वापस मिलेगा, बल्कि जनता के बीच भी एक सकारात्मक संदेश जाएगा कि कानून और नियम सबके लिए बराबर हैं। चुनाव लड़ने के इच्छुक नेता अब टिकट की दौड़ के साथ-साथ अपने बकाये बिलों को क्लियर करने के लिए जोन कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं।
प्रशासन के इस कदम का मुख्य उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और नगर निगमों के अटके हुए राजस्व की वसूली करना है। अक्सर देखा जाता है कि लोग टैक्स बकाया होने के बावजूद चुनाव मैदान में उतर जाते हैं। अब इस नए नियम से न केवल निकायों को करोड़ों रुपये का बकाया राजस्व वापस मिलेगा, बल्कि जनता के बीच भी एक सकारात्मक संदेश जाएगा कि कानून और नियम सबके लिए बराबर हैं। चुनाव लड़ने के इच्छुक नेता अब टिकट की दौड़ के साथ-साथ अपने बकाये बिलों को क्लियर करने के लिए जोन कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं।

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