Rajasthan News: अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाएं —शिक्षा मंत्री

Rajasthan News: अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाएं —शिक्षा मंत्री


छोटा अखबार।

निर्णय और नसीहतों के बीच राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। जयपुर के शिक्षा संकुल में शुक्रवार को आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और विभिन्न शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच तीखी और वैचारिक बहस देखने को मिली।

नए सत्र की तैयारी और NEP 2020 पर मंथन—

1 अप्रैल से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र को लेकर आयोजित इस बैठक का मुख्य एजेंडा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन पर केंद्रित था। शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य केवल साक्षरता बढ़ाना नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है। बैठक में आगामी 'प्रवेशोत्सव' को एक उत्सव के रूप में मनाने और 'मेगा पीटीएम' (अभिभावक-शिक्षक बैठक) के माध्यम से अभिभावकों को सरकारी स्कूलों के प्रति जागरूक करने की रणनीति पर विस्तृत चर्चा हुई। इस दौरान एक ऐसा क्षण आया जिसने वहां मौजूद सभी प्रतिनिधियों को चौंका दिया। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने शिक्षकों को नसीहत देते हुए कहा कि व्यवस्था में सुधार की शुरुआत स्वयं से होनी चाहिए। उन्होंने सभागार में मौजूद शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों से कहा, "आप सभी यहाँ से यह शपथ लेकर जाएं कि आप अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में ही पढ़ाएंगे।" मंत्री का मानना है कि जब शिक्षक स्वयं अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजेंगे, तो जनता का विश्वास इन संस्थानों के प्रति स्वतः बढ़ जाएगा।

शिक्षक संगठनों का पलटवार: "सिर्फ हम ही क्यों?—

मंत्री की इस नसीहत पर शुरुआत में तो सन्नाटा पसर गया, लेकिन जल्द ही शिक्षक संगठनों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। संगठनों ने एक सुर में मांग उठाई कि यदि सरकारी स्कूलों के प्रति विश्वास जगाना है, तो यह नियम केवल शिक्षकों पर ही क्यों लागू हो? उन्होंने तर्क दिया कि राजकोष से वेतन प्राप्त करने वाले प्रत्येक व्यक्ति—चाहे वह आईएएस अधिकारी हो, पुलिसकर्मी हो, नेता हो या अन्य सरकारी कर्मचारी—उन सभी के लिए अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाना अनिवार्य होना चाहिए।

शिक्षकों का कहना है कि जब नीति निर्माता और उच्चाधिकारी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजेंगे, तभी संसाधनों और व्यवस्थाओं में वास्तविक सुधार आएगा। उन्होंने इसे केवल शिक्षकों की जिम्मेदारी मानने के बजाय एक 'साझा जवाबदेही' बनाने की वकालत की।

भविष्य की राह—

बैठक में शिक्षकों के तबादलों, रिक्त पदों को भरने और गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति जैसे पुराने मुद्दों पर भी चर्चा हुई। हालांकि, 'अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाने' की बहस ने अन्य सभी मुद्दों को पीछे छोड़ दिया। शिक्षा मंत्री ने प्रतिनिधियों की बातों को सुना और संकेत दिए कि सरकार शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी।

अब देखना यह होगा कि 1 अप्रैल से शुरू होने वाले नए सत्र में यह 'शपथ' और 'साझा जिम्मेदारी' की बहस धरातल पर क्या बदलाव लाती है। क्या राजस्थान देश का ऐसा पहला राज्य बनेगा जहाँ सरकारी सेवा में होने की पहली शर्त बच्चों का सरकारी स्कूल में पढ़ना होगी?

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