Kota News: प्रसूताओं ने सरकार से किडनी ट्रांसप्लांट या इच्छा मृत्यु की अनुमति देने की भावुक अपील
Kota News: प्रसूताओं ने सरकार से किडनी ट्रांसप्लांट या इच्छा मृत्यु की अनुमति देने की भावुक अपील
छोटा अखबार।
कोटा मेडिकल कॉलेज में सिजेरियन डिलीवरी के बाद प्रसूताओं की किडनी फेल होने के मामले में नया मोड़ आ गया है, जहाँ भर्ती पीड़ित महिलाओं ने सरकार से किडनी ट्रांसप्लांट या इच्छा मृत्यु की अनुमति देने की भावुक अपील की है।
मुख्य घटनाक्रम और मांगें—
इच्छा मृत्यु की गुहार: न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल के नेफ्रोलॉजी वार्ड में पिछले 70 दिनों से भर्ती पीड़ित महिलाओं में से 4 पहली बार मीडिया के सामने आईं। उन्होंने रोते हुए सरकार से कहा कि या तो उनका किडनी ट्रांसप्लांट कराया जाए या उन्हें इच्छा मृत्यु की अनुमति दी जाए। इस संबंध में उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक मार्मिक ज्ञापन भी भेजा है।
डायलिसिस कराने से इनकार: पीड़ित महिलाओं के परिजनों ने दो दिन पहले जिला कलेक्टर को ज्ञापन देकर किडनी ट्रांसप्लांट की व्यवस्था के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। समय सीमा पूरी होने पर प्रशासन से कोई ठोस आश्वासन न मिलने के विरोध में महिलाओं ने बुधवार से डायलिसिस कराने से साफ मना कर दिया है।
लापरवाही का आरोप: पीड़ित महिलाओं (रागिनी, आरती, पिंकी, सुशीला और धन्नी) का आरोप है कि मई के पहले सप्ताह में प्रसव के दौरान अस्पताल प्रशासन की घोर लापरवाही और कथित घटिया दवाओं/इंजेक्शनों के कारण उनकी दोनों किडनियां खराब हुईं। वे अब तक असहनीय शारीरिक दर्द के साथ 32 से अधिक बार डायलिसिस का दंश झेल चुकी हैं।
आर्थिक और मानसिक संकट—
इस त्रासदी ने पीड़ित परिवारों को पूरी तरह तोड़ दिया है। लगातार इलाज और अस्पताल के खर्चों के कारण दैनिक वेतन भोगी और गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति बदहाल हो चुकी है, यहाँ तक कि कुछ परिजनों को अपनी आजीविका के साधन (जैसे टैक्सी) भी बेचने पड़े हैं। उल्लेखनीय है कि इसी तरह के पोस्ट-डिलीवरी इन्फेक्शन के कारण अस्पताल में 5 अन्य प्रसूताओं की मौत भी हो चुकी है। हालांकि राज्य सरकार ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन पीड़ित परिवार अब आश्वासन के बजाय त्वरित इलाज और न्याय की मांग पर अड़े हैं।

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