Rajasthan News: 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए भी टीईटी अनिवार्य, सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा पास करने के लिए दिया 3 साल का समय

Rajasthan News: 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए भी टीईटी अनिवार्य, सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा पास करने के लिए दिया 3 साल का समय


छोटा अखबार।

शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर लंबे समय से जारी असमंजस की स्थिति अब पूरी तरह समाप्त हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले और केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में दिए गए स्पष्टीकरण के बाद यह साफ हो गया है कि वर्ष 2011 से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों को भी टीईटी से पूरी तरह छूट नहीं दी जाएगी। अब नौकरी में बने रहने और भविष्य में पदोन्नति (प्रमोशन) पाने के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना एक अनिवार्य शर्त बन गया है।

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लोकसभा में सांसद लालजी वर्मा द्वारा पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट की। मंत्रालय ने कहा कि टीईटी केवल नई सरकारी भर्तियों के लिए ही आवश्यक नहीं है, बल्कि वर्तमान में कार्यरत (सेवारत) शिक्षकों की पदोन्नति के लिए भी यह बेहद जरूरी है। बिना इस परीक्षा को पास किए कोई भी शिक्षक पदोन्नति पाने का पात्र नहीं माना जाएगा।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने सेवारत शिक्षकों को एक बड़ी राहत भी दी है। अदालत ने टीईटी पास करने की निर्धारित समय-सीमा को 2 वर्ष से बढ़ाकर अब 3 वर्ष कर दिया है। इसके साथ ही, कोर्ट ने राजस्थान सहित देश के सभी राज्यों को आदेश दिया है कि वे अपने-अपने राज्यों में हर छह महीने में टीईटी परीक्षा का आयोजन सुनिश्चित करें ताकि शिक्षकों को पर्याप्त अवसर मिल सकें।

इस निर्णय के बाद शिक्षा विभाग में हलचल तेज हो गई है। ऐसे शिक्षक जो बिना टीईटी के सालों से सेवा दे रहे थे, उन्हें अब अपनी नौकरी सुरक्षित रखने और करियर में आगे बढ़ने के लिए इस परीक्षा को पास करना ही होगा। सरकार के इस कड़े रुख से साफ है कि देश में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता और मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

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