Rajasthan News: प्रदेशभर में 'पोषण पखवाड़ा' की धूम, नौनिहालों के डिजिटल डिटॉक्स पर जोर
Rajasthan News: प्रदेशभर में 'पोषण पखवाड़ा' की धूम, नौनिहालों के डिजिटल डिटॉक्स पर जोर
छोटा अखबार।
राजस्थान में 8वें राष्ट्रीय पोषण पखवाड़े के तहत बच्चों के समग्र विकास को लेकर एक नई मुहिम शुरू की गई है। इस बार राज्य सरकार का मुख्य फोकस न केवल बच्चों के बेहतर खान-पान (पोषण) पर है, बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य और मस्तिष्क विकास के लिए 'स्क्रीन टाइम' को कम करने पर भी है।
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| AI Photo |
20 लाख से अधिक गतिविधियां आयोजित—
महिला एवं बाल विकास विभाग के सौजन्य से आयोजित इस पखवाड़े के दौरान अब तक प्रदेशभर में 20 लाख से अधिक विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा चुकी हैं। इन कार्यक्रमों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने ग्रासरूट स्तर पर जाकर पोषण के महत्व को समझाया है। खेल-कूद, पोषण वाटिका का निर्माण, और स्वस्थ बालक-बालिका स्पर्धा जैसी गतिविधियों ने इस अभियान को एक जनांदोलन का रूप दे दिया है।
स्क्रीन टाइम: आधुनिक समय की बड़ी चुनौती—
इस वर्ष के अभियान की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बच्चों में बढ़ती मोबाइल और टीवी की लत को कम करना है। सरकार अभिभावकों को जागरूक कर रही है कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम बच्चों के संज्ञानात्मक (Cognitive) विकास को बाधित कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहने से बच्चों में एकाग्रता की कमी, चिड़चिड़ापन और नींद की समस्या बढ़ रही है। इसके विकल्प के रूप में अभिभावकों को बच्चों के साथ पारंपरिक खेल खेलने और उन्हें प्रकृति से जोड़ने की सलाह दी जा रही है।
मस्तिष्क विकास और पोषण का समन्वय—
सरकार का मानना है कि जीवन के शुरुआती साल (First 1000 Days) मस्तिष्क के विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। संतुलित आहार के साथ-साथ यदि बच्चों को डिजिटल स्क्रीन से दूर रखकर रचनात्मक गतिविधियों में लगाया जाए, तो उनके सीखने की क्षमता में कई गुना वृद्धि होती है। इस संदेश को 'पोषण भी, पढ़ाई भी' अभियान के साथ जोड़कर हर घर तक पहुँचाया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से राजस्थान सरकार एक स्वस्थ और मानसिक रूप से सजग भावी पीढ़ी तैयार करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है।

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