Rajasthan News: राजस्थान में स्थानीय निकाय और पंचायतीराज चुनावों के क्रम में बदलाव की सुगबुगाहट

Rajasthan News: राजस्थान में स्थानीय निकाय और पंचायतीराज चुनावों के क्रम में बदलाव की सुगबुगाहट


छोटा अखबार।

राजस्थान की सियासत में आगामी स्थानीय निकाय और पंचायतीराज चुनावों को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक व राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है। पारंपरिक चुनावी क्रम को बदलते हुए इस बार राज्य सरकार पहले नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिकाओं (शहरी निकायों) के चुनाव कराने की तैयारी में है, जिसके बाद ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत चुनाव संपन्न कराए जाएंगे।

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अदालत में नया रुख और समय सीमा—

यद्यपि राजस्थान उच्च न्यायालय ने आगामी 31 जुलाई तक चुनाव संपन्न कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग और पंचायतीराज विभाग ने ओबीसी आरक्षण रिपोर्ट में हो रही देरी और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का हवाला देते हुए इसे तय समय में कराने में असमर्थता जताई है। अब सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग अदालत के समक्ष नया प्रस्ताव रख सकते हैं, जिसमें सितंबर से नवंबर के बीच चरणबद्ध तरीके से चुनाव कराने की अनुमति मांगी जा सकती है।

रणनीतिक मनोवैज्ञानिक लाभ की योजना—

इस क्रम परिवर्तन के पीछे सत्ताधारी दल की गहरी राजनीतिक रणनीति छिपी है। शहरी क्षेत्रों को अमूमन भाजपा के पारंपरिक गढ़ के रूप में देखा जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार पहले शहरी निकायों में बेहतर प्रदर्शन कर जीत का परचम लहराती है, तो इसका एक बड़ा मनोवैज्ञानिक लाभ ग्रामीण मतदाताओं पर पड़ेगा। शहरों से उठने वाली यह सकारात्मक राजनीतिक लहर पंचायत चुनावों में ग्रामीण क्षेत्रों तक पार्टी के पक्ष में माहौल तैयार करने में मदद करेगी।

ओबीसी आरक्षण रिपोर्ट और प्रशासनिक तैयारी—

इस पूरी चुनावी कवायद का एक मुख्य केंद्र ओबीसी आरक्षण की रिपोर्ट भी है। चर्चा है कि सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग की इस बहुप्रतीक्षित रिपोर्ट को पहले निकाय चुनावों को ध्यान में रखकर तैयार करवा रही है, ताकि आरक्षण की कानूनी और सामाजिक जटिलताओं को समय रहते हल कर शहरी क्षेत्रों में बिना किसी बाधा के चुनावी बिगुल फूंका जा सके। कुल मिलाकर, यह चुनावी उलटफेर राजस्थान की स्थानीय राजनीति की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।

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