Rajasthan News: राजस्थान की सरकारी स्कूलों में शिक्षकों का टोटा, एक ही टीचर के भरोसे कई कक्षाएं
Rajasthan News: राजस्थान की सरकारी स्कूलों में शिक्षकों का टोटा, एक ही टीचर के भरोसे कई कक्षाएं
छोटा अखबार।
राजस्थान में शिक्षा सुधार, नामांकन बढ़ाने और ड्रॉपआउट दर को कम करने के बड़े-बड़े सरकारी दावे किए जा रहे हैं। लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल उलट कहानी बयां कर रही है। सरकारी स्कूलों में खाली पड़े पद प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ को कमजोर कर रहे हैं। शिक्षा विभाग के आधिकारिक 'शाला दर्पण' पोर्टल के 1 जुलाई 2026 के ताजा आंकड़े इस गंभीर संकट की पुष्टि करते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, शिक्षा विभाग में कुल 4,13,910 पद स्वीकृत हैं। इनमें से केवल 2,93,760 पदों पर ही कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 1,20,150 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं।
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पढ़ाई की गुणवत्ता पर संकट—
जब स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक, प्राचार्य, प्रयोगशाला सहायक, पुस्तकालयाध्यक्ष और सहायक कर्मचारी ही नहीं होंगे, तो पढ़ाई के स्तर में सुधार की उम्मीद कैसे की जा सकती है? स्टाफ की भारी कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में हालात बदतर हैं। वहां एक ही शिक्षक को एक साथ कई कक्षाएं संभालनी पड़ रही हैं। शिक्षक पढ़ाएं या प्रशासनिक काम संभालें, यह उनके सामने बड़ी दुविधा है।
दावों पर खड़े हुए सवाल—
ऐसी स्थिति में बच्चों का स्कूल में ठहराव सुनिश्चित करना और नामांकन बढ़ाना एक गंभीर चुनौती बन गया है। बिना शिक्षकों के बुनियादी शिक्षा की गुणवत्ता दम तोड़ रही है, जिससे मजबूर होकर अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेज रहे हैं। सरकार के शिक्षा सुधार के तमाम वादे और नीतियां धरातल पर नाकाम साबित हो रही हैं। यदि जल्द ही इन खाली पदों पर स्थायी भर्तियां नहीं की गईं, तो नौनिहालों का भविष्य और सरकारी स्कूलों का ढांचा पूरी तरह चरमरा जाएगा।
जब तक विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों की भरपाई नहीं की जाएगी तब तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात करना बेमानी होगी। विभाग शीघ्र शिक्षकों की नई भर्ती, बकाया वरिष्ठ अध्यापक एवं व्याख्याता की पदोन्नति,स्टाफिंग पैटर्न, पदोन्नत प्रधानाचार्य व उप प्रधानाचार्य की काउंसलिंग शीघ्र करवाकर रिक्त पदों को शीघ्र भरना चाहिए।
—मोहर सिंह सलावद
प्रदेशाध्यक्ष
शिक्षक संघ एलीमेंट्री सेकेंडरी टीचर एसोसिएशन (रेसटा)

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