Political News: सिंधिया राजघराने का 4 दशक पुराना संपत्ति विवाद सुलझा, कोर्ट में बनी आपसी सहमति
Political News: सिंधिया राजघराने का 4 दशक पुराना संपत्ति विवाद सुलझा, कोर्ट में बनी आपसी सहमति
छोटा अखबार।
देश के सबसे प्रतिष्ठित और रसूखदार राजनीतिक परिवारों में से एक, सिंधिया राजपरिवार का लगभग 40 साल पुराना और ₹40,000 करोड़ से अधिक का संपत्ति विवाद आखिरकार आपसी सहमति से सुलझ गया है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआओं—राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, मध्य प्रदेश की पूर्व मंत्री यशोधरा राजे और उषा राजे—के बीच पैतृक संपत्ति के ऐतिहासिक बंटवारे को लेकर अंतिम सहमति बन गई है। इस समझौते की औपचारिक कानूनी प्रक्रिया ग्वालियर के जिला न्यायालय में पूरी की जा रही है।
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ऐतिहासिक और शाही संपत्तियों का होगा बंटवारा—
इस समझौते के तहत देश के विभिन्न हिस्सों में फैली अरबों रुपये की शाही संपत्तियों का मालिकाना हक तय किया गया है। विवाद के मुख्य केंद्र में शामिल प्रमुख संपत्तियां निम्नलिखित हैं:
ग्वालियर का जय विलास पैलेस, शिवपुरी का माधव विलास पैलेस, दिल्ली का ग्वालियर हाउस और उज्जैन का कालिया देव पैलेस शामिल हैं। इसके अलावा मुंबई के आलीशान फ्लैट्स और पुणे के पदम विलास पैलेस को भी इस राजीनामे के तहत दोनों पक्षों के बीच विभाजित किया जा रहा है।बदलते राजनीतिक समीकरणों का असर—
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पारिवारिक विवाद के अंत के पीछे बदलते राजनीतिक समीकरणों की बड़ी भूमिका रही है। साल 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद से ही इस कानूनी लड़ाई को बातचीत से सुलझाने के प्रयास तेज हो गए थे। अब एक ही राजनीतिक दल का हिस्सा होने के चलते बुआ और भतीजे ने अदालती कड़वाहट को भुलाकर बाहर ही समझौते का फॉर्मूला तैयार कर लिया। इस समझौते से न सिर्फ अदालतों में लंबित दर्जनों मुकदमों का अंत होगा, बल्कि मध्य प्रदेश और राजस्थान की राजनीति में सिंधिया परिवार का वर्चस्व और एकजुटता और अधिक मजबूत होगी।

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