Rajasthan News: आरजीएचएस पर आर्थिक संकट: 2200 करोड़ का भुगतान बकाया, मरीजों की बढ़ी मुश्किलें
Rajasthan News: आरजीएचएस पर आर्थिक संकट: 2200 करोड़ का भुगतान बकाया, मरीजों की बढ़ी मुश्किलें
छोटा अखबार।
राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी 'राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम' (RGHS) इस समय अपने सबसे बुरे वित्तीय दौर से गुजर रही है। राज्य के निजी अस्पतालों, डायग्नोस्टिक सेंटरों और फार्मा स्टोरों का करीब 2200 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान पिछले 8-9 महीनों से अटका हुआ है। लंबे समय से लंबित इस बकाया राशि के कारण प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं।
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सेवा प्रदाताओं का हल्लाबोल—
लगातार आश्वासनों के बाद भी भुगतान न होने से नाराज निजी चिकित्सा सेवा प्रदाताओं ने गत 13 अप्रैल से योजना के तहत कैशलेस सुविधाओं का पूर्ण बहिष्कार शुरू कर दिया है। संचालकों का तर्क है कि भारी बकाया के चलते वे अब दवा कंपनियों का भुगतान करने और कर्मचारियों को वेतन देने की स्थिति में नहीं हैं। कई छोटे अस्पताल और दवा केंद्र तो बंदी के कगार पर पहुंच गए हैं।
मरीजों पर दोहरी मार—
इस बहिष्कार का सबसे घातक असर सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों पर पड़ रहा है। गंभीर बीमारियों का इलाज करा रहे बुजुर्गों और नियमित दवा लेने वाले मरीजों को अब अपनी जेब से भारी खर्च करना पड़ रहा है। कई अस्पतालों ने भर्ती मरीजों को डिस्चार्ज करना शुरू कर दिया है या उनसे नकद भुगतान की मांग की जा रही है, जिससे जनता में भारी रोष है।
IMA की हस्तक्षेप की मांग—
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार से तत्काल समाधान की मांग की है। IMA के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह केवल आर्थिक नहीं बल्कि व्यवस्थागत संकट है। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से एक उच्च स्तरीय समिति (High-Level Committee) गठित करने की मांग की है, जो न केवल वर्तमान बकाया का निपटारा करे, बल्कि भविष्य में भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए ठोस रूपरेखा तैयार करे।
फिलहाल, सरकार और सेवा प्रदाताओं के बीच गतिरोध बरकरार है। यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो प्रदेश की स्वास्थ्य प्रणाली पूरी तरह ठप हो सकती है।

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