Rajasthan News: राजस्थान में महिलाओं की सुरक्षा पर यूपी के मुख्यमंत्री का सवालिया निशान
Rajasthan News: राजस्थान में महिलाओं की सुरक्षा पर यूपी के मुख्यमंत्री का सवालिया निशान
छोटा अखबार।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का चित्तौड़गढ़ में दिया गया बयान राजस्थान की राजनीति में नई चर्चा छेड़ गया है। उन्होंने मेवाड़ की शौर्य परंपरा को नमन करते हुए चित्तौड़गढ़ के किले को भारत की अस्मिता का प्रहरी बताया, लेकिन उनके भाषण का सबसे चर्चित हिस्सा वह रहा जहां उन्होंने यूपी में महिलाओं की सुरक्षा को 'गारंटी' के तौर पर पेश किया। राजस्थान की धरती पर खड़े होकर योगी का यह कहना कि "आज उत्तर प्रदेश में महिलाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं," पड़ोसी राज्य की भजनलाल सरकार के लिए एक असहज स्थिति पैदा करता है।
भजनलाल सरकार के लिए चुभने वाले मायने—
योगी आदित्यनाथ का यह बयान सीधे तौर पर राजस्थान की कानून-व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाता है। एक ही विचारधारा की सरकार होने के बावजूद, जब एक मुख्यमंत्री दूसरे राज्य में जाकर अपने प्रदेश के 'सुरक्षा मॉडल' का बखान करता है, तो यह संकेत जाता है कि मेजबान राज्य में स्थिति वैसी नहीं है जैसी होनी चाहिए। राजस्थान में भाजपा ने कांग्रेस शासन के दौरान 'महिला अपराध' को सबसे बड़ा मुद्दा बनाया था, लेकिन सत्ता में आने के बाद भी जमीनी हकीकत में कोई क्रांतिकारी बदलाव नहीं दिख रहा है। योगी का बयान राजस्थान सरकार को आईना दिखाने जैसा है कि सुरक्षा केवल वादों से नहीं, बल्कि 'यूपी मॉडल' जैसे कड़े इकबाल से आती है।
क्या राजस्थान में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं?—
आंकड़ों और हालिया घटनाओं पर नजर डालें तो राजस्थान में महिलाओं की सुरक्षा एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के पिछले कुछ सालों के आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में राजस्थान अक्सर शीर्ष राज्यों में रहा है। भजनलाल सरकार के कार्यकाल में भी प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से दुष्कर्म, अपहरण और घरेलू हिंसा की खबरें लगातार आ रही हैं। योगी आदित्यनाथ के 'सुरक्षा और सम्मान' के दावे के विपरीत, राजस्थान में आज भी महिलाएं रात के समय घर से बाहर निकलने में असुरक्षा महसूस करती हैं। सरकारी तंत्र की विफलता का ही नतीजा है कि मुख्यमंत्री को दूसरे राज्य के मॉडल की प्रशंसा सुननी पड़ रही है।
देशव्यापी स्थिति और खोखले दावे—
सिर्फ राजस्थान ही नहीं, पूरे देश में महिला सुरक्षा की स्थिति संतोषजनक नहीं है। जब नेता 'पूरी तरह सुरक्षित' होने का दावा करते हैं, तो वे उन हजारों पीड़िताओं के दर्द को नजरअंदाज कर देते हैं जो थानों के चक्कर काट रही हैं। चित्तौड़गढ़ जैसे ऐतिहासिक स्थल से जब सुरक्षा की बात होती है, तो यह केवल चुनावी भाषण बनकर रह जाती है। धरातल पर न तो उत्तर प्रदेश पूरी तरह अपराध मुक्त हुआ है और न ही राजस्थान में सुरक्षा की वह गारंटी दिख रही है जिसका वादा चुनाव के समय किया गया था।
योगी आदित्यनाथ का बयान एक ओर तो उनकी अपनी सरकार की पीठ थपथपाता है, लेकिन दूसरी ओर यह राजस्थान की भजनलाल सरकार की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा 'डिस्क्लेमर' है। यह बयान साफ करता है कि राजस्थान में 'सुरक्षा का राज' स्थापित करना अभी कोसों दूर है। जब तक सरकारें आंकड़ों की बाजीगरी छोड़कर कड़े कदम नहीं उठातीं, तब तक "महिलाएं सुरक्षित हैं" जैसे दावे केवल किलों की दीवारों से टकराकर दम तोड़ने वाले नारे ही बने रहेंगे।
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