Rajasthan News: 'लेटर वॉर' से भाजपा में अनुशासन और एकजुटता के दावों पर लगे सवालिया निशान
Rajasthan News: 'लेटर वॉर' से भाजपा में अनुशासन और एकजुटता के दावों पर लगे सवालिया निशान
छोटा अखबार।
भाजपा में लंबे समय से सुलग रहा अंतर्कलह अब 'लेटर वॉर' के साथ खुलकर सामने आ गया है। असम और पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया और मावली के पूर्व विधायक धर्मनारायण जोशी के बीच के आरोप-प्रत्यारोप ने राजस्थान की सियासत में गरमाहट पैदा कर दी है।
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| AI Photo |
हाल ही में राज्यपाल कटारिया ने मीडिया के जरिए जोशी पर निशाना साधते हुए उन्हें 'रणछोड़' करार दिया था। कटारिया का सवाल था कि जोशी ने एक चुनाव जीतने के बाद अपनी सीट क्यों छोड़ी? अब पलटवार करते हुए जोशी ने 11 पन्नों की एक लंबी चिट्ठी लिखकर कटारिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
"रणछोड़ मैं नहीं, आप हैं"—
जोशी ने अपनी चिट्ठी में कड़ा रुख अपनाते हुए लिखा, "रणछोड़ मैं नहीं हूं, आपने तो हार के डर से खुद अपनी सुरक्षित सीटें बदली थीं। मैंने जीतकर सीट छोड़ी थी, जबकि आप पर आरोप है कि आपने मुझे हराने के लिए विरोधियों की मदद की।" जोशी ने दावा किया कि 2013 में उनका टिकट कटवाने के पीछे कटारिया का हाथ था और वे 15 वर्षों तक क्षेत्र में सक्रिय रहे, इसके बावजूद उन्हें टारगेट किया गया।
पुराने जख्मों को कुरेदा—
पत्र में जोशी ने एक पुराना मुद्दा उठाते हुए पूछा कि 2008 के चुनाव में कटारिया पर कांग्रेस प्रत्याशी को आर्थिक सहयोग दिलाने के आरोप लगे थे, उस पर वे आज तक मौन क्यों हैं? जोशी ने साफ कहा कि जब राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति ने उन्हें सार्वजनिक मंच से निशाना बनाया, तो जवाब देना जरूरी हो गया था।
भाजपा के इन दो कद्दावर नेताओं के बीच की यह रार बता रही है कि गुटबाजी की जड़ें कितनी गहरी हैं। फिलहाल इस चिट्ठी ने पार्टी के भीतर अनुशासन और एकजुटता के दावों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

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