Jaipur News: गुलाबी नगरी में लोक संस्कृति का अनूठा संगम: आज निकलेगी ‘बूढ़ी गणगौर’ की शाही सवारी

Jaipur News: गुलाबी नगरी में लोक संस्कृति का अनूठा संगम: आज निकलेगी ‘बूढ़ी गणगौर’ की शाही सवारी


छोटा अखबार।

छोटी काशी के नाम से विख्यात जयपुर शहर इन दिनों पूरी तरह गणगौर के रंग में रंगा हुआ है। शनिवार को सिटी पैलेस से निकली गणगौर माता की भव्य सवारी के बाद अब रविवार शाम को पारंपरिक ‘बूढ़ी गणगौर’ की सवारी निकाली जाएगी। लोक मान्यताओं और दशकों पुरानी परंपरा को जीवंत रखते हुए यह सवारी भी उसी राजसी ठाट-बाट के साथ निकलेगी, जिसका गवाह बनने के लिए देशी-विदेशी पर्यटकों और स्थानीय लोगों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। 

परंपरा और आस्था का प्रतिबिंब—

जयपुर की स्थापना के समय से ही गणगौर उत्सव का विशेष महत्व रहा है। शनिवार को चैत्र शुक्ल तृतीया के अवसर पर मुख्य गणगौर माता की सवारी निकाली गई थी, वहीं इसके अगले दिन यानी चतुर्थी को ‘बूढ़ी गणगौर’ की सवारी निकालने की विशिष्ट परंपरा है। जानकारों के अनुसार, बूढ़ी गणगौर की सवारी मुख्य रूप से उन लोगों के लिए एक और अवसर होती है जो पहले दिन दर्शन करने से चूक जाते हैं, साथ ही यह विदाई की बेला का प्रतीक भी है। 

शाही लवाजमा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ—

रविवार शाम को ठीक 5:45 बजे सिटी पैलेस के त्रिपोलिया गेट से बूढ़ी गणगौर की सवारी रवाना होगी। सवारी में हाथी, घोड़े और ऊंटों का भव्य लवाजमा शामिल रहेगा। राजसी पोशाकों में सजे घुड़सवार और पचरंगा ध्वज लिए सिपाही इस शोभायात्रा की शोभा बढ़ाएंगे। पर्यटन विभाग के अनुसार, शनिवार की भांति रविवार को भी राजस्थान के विभिन्न अंचलों से आए लोक कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। इसमें कच्छी घोड़ी, कालबेलिया नृत्य, और गैर नृत्य की टोलियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। शहनाई की मधुर धुनों और नगाड़ों की गूंज के साथ जब माता की पालकी त्रिपोलिया बाजार से छोटी चौपड़ की ओर बढ़ेगी, तो पूरा वातावरण 'गौर माता की जय' के जयकारों से गुंजायमान हो उठेगा। 

पर्यटन और जनसैलाब—

शनिवार को उमड़े भारी जनसैलाब को देखते हुए प्रशासन ने रविवार के लिए भी विशेष सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के प्रबंध किए हैं। शहर के परकोटा क्षेत्र में त्रिपोलिया बाजार, छोटी चौपड़ और गणगौरी बाजार तक के मार्ग को सजाया गया है। विदेशी पर्यटकों के बैठने के लिए विशेष दीर्घाएं बनाई गई हैं, जहाँ वे राजस्थान की इस अनुपम विरासत को अपने कैमरों में कैद कर सकेंगे।

बूढ़ी गणगौर की सवारी के गणगौरी बाजार पहुंचकर संपन्न होने के साथ ही दो दिवसीय इस राजकीय गणगौर महोत्सव का विधिवत समापन होगा। इसके साथ ही सुहागिन महिलाएं और बालिकाएं अगले वर्ष माता के पुनः आगमन की कामना के साथ उन्हें विदाई देंगी। 

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