सोशल मीडिया पर यह हो क्या रहा है ॽ

 सोशल मीडिया पर यह हो क्या रहा है ॽ

अशोक शर्मा 


छोटा अखबार।

वाट्सएप ग्रुप, मतलब सोशल मीडिया प्लेटफार्म। खबरनामा वाट्सएप ग्रुप के एडविन ने एक संदेश जारी किया है कि ग्रुप में कोई भी सदस्य मोदी और राहुल पर कोई भी बहस की पोस्ट न डालें। इसके अलावा गुड मार्निंग संदेश भी नहीं। यही व्यवस्था दिल्ली, यूपी, एमपी और महाराष्ट्र के कई वाट्सएप ग्रुप के ऐडविन ने काफी समय पहले से की हुई है। खबरनामा वाट्सएप ग्रुप के ऐडविन की यह बहुत अच्छी पहल है और इसके लिए वे बधाई के पात्र हैं। चूंकि हक़ीक़त यही है कि अधिकांश लोग दिन भर बैठे-बैठे वाट्सएप पर ऐसी ही क्रिया-प्रतिक्रिया में उलझे रहते हैं। बुजुर्गों की बात अलग है क्योंकि वे अपने ज्ञान और अनुभव को शेयर करते हैं लेकिन युवा वर्ग, जैसे उनके पास और कोई काम है ही नहीं और यही उनकी सर्विस है।



यह सच है कि लोगों ने सभी वाट्सएप ग्रुप्स को भड़ास डाट काम बना कर रख दिया है। दिन भर बैठे-बैठे वाट्सएप पर यही करते रहते हैं कि मोदी ने राहुल के लिए क्या कहा और राहुल ने मोदी के लिए क्या कहा। कहा तो ऐसा क्यों कहा। ममता बनर्जी क्या कर रही हैं, नीतीश कुमार ने यह ठीक नहीं किया, कंगना रनौत ने बीफ क्यों खाया आदि-आदि। मोदी और राहुल ने एक-दूसरे के लिए जो कुछ कहा या कह रहे हैं उस पर बैठे-बैठे तर्क-वितर्क करते रहना ही जैसे इनकी दिनचर्या बन गया है और उन्हें पढ़ना लोगों की बाध्यता हो गई है। जैसे इसके बिना न उनका खाना पचेगा और न ही उन्हें नींद आएगी। ऐसे लोगों ने सोशल मीडिया का हुलिया बिगाड़ कर रख दिया।

दूसरी ओर कुछ लोग आफिसों में बैठे-बैठे सोशल मीडिया पर गुटर गूं करते रहते हैं। काम-धाम छोड़ कर इसी में रमे रहते हैं। उस पर तुर्रा यह कि वे खुद को सोशल मीडिया पर एक्टिव शो करते हैं। सामने काम रखा है, विंडो पर क्यू में लोग खड़े हैं लेकिन ये अपनी इसी ताकधिन्ना में मस्त हैं। कुछ लोग तो मोदी और राहुल को लेकर इस कदर ज़ुबानी आस्तीन चढ़ाए रहते हैं जैसे वे उन्हें सोल्व कर देंगे या उसके लिए मर जाएंगे अथवा मार देंगे। 

इन ग्रुप्स में कुछ लोग तो इस तरह एक-दूसरे से उलझते रहते हैं जैसे वे मोदी या राहुल के लिए ही वाट्सएप ग्रुप में बैठे हुए हैं और ये दोनों दल उन्हें " पे " कर रहे हैं। सच में कुछ लोग ऐसे लिख भी रहे हैं। ऐसे लोग अपने स्वार्थ के लिए ग्रुप की वेल्यु भी खराब कर रहे हैं। इसके अलावा कुछ ग्रुप वाले भी एक ही आईटम बार-बार रिपीट करते रहते हैं जैसे उनकी भी उनसे कोई बंधी है। कुछ लोग भड़ास निकालने में इस कदर उलझ जाते हैं कि स्तरहीन भाषा का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे लोग न केवल वाट्सएप ग्रुप का स्तर गिरा रहे हैं बल्कि वे शिक्षित हैं इस पर भी प्रश्नचिन्ह लग रहा है। कुछ लोगों ने गुड मार्निंग संदेश में अपनी कंपनी का नाम, मोबाइल नंबर और वर्क भी लिख कर भेजते हैं, यह एक तरह की चालाकी पूर्ण गुड मार्निंग संदेश है। चूंकि इस आड़ में मुफ्त में सोशल मीडिया पर कंपनी का विज्ञापन भी प्रकाशित कर लेते हैं और धंधा भी।

एक और बात कि अखबारों में दोनों पार्टियों को लेकर रोज बहुत-कुछ छपता रहता है लेकिन वहां इस तरह भड़ास निकालने वाले चुप रहते हैं। सिर्फ वाट्सएप पर ही फिजूल ताव खाते रहते हैं। इसी को घर की खेती समझ रखा है। अखबारों में पहले पाठकों के लिए एक कालम आता था लेकिन बाद में अखबारों ने उसे बंद कर दिया क्योंकि फालतू कलम घसीटने वालों की बाढ़ आ गई थी। खबरनामा ने जो आपत्ति उठाई है वह सही है। उन्ही की तरह दिल्ली, यूपी और एमपी के भी कई वाट्सएप ग्रुप के ऐडविन ने ठीक ऐसा ही क़दम उठाया हुआ है। उन्होंने अपने निर्देश में यही कहा कि सोशल मीडिया को सोशल मीडिया ही रहने दें, इसे फ़िज़ूल की बातों का प्लेटफार्म न बनाएं और जो नहीं मानता है उसे ग्रुप से बाहर कर देते हैं।

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