राकेश टिकैत के आंसूओं ने फिर बुलाया किसानों को दिल्ली बॉर्डरों पर

राकेश टिकैत के आंसूओं ने फिर बुलाया किसानों को दिल्ली बॉर्डरों पर 


छोटा अखबार।

26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली के बाद दिल्ली के कई हिस्सों सहित लाल क़िले पर हुए हुड़दंग के बाद किसान राजधानी की अलग-अलग सीमाओं पर जारी प्रदर्शनों से वापस लौट चुके है। लेकिन गुरुवार को गाज़ीपुर बॉर्डर पर राकेश टिकैत के आंसूओं ने किसानों को संबल दिया है। इसी कारण आंदोलन ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ लिया है।

समाचार सूत्रों के अनुसार बड़ी तादाद में राजस्थान सहित पश्चिम यूपी और पंजाब, हरियाणा से किसान अपनी—अपनी जगहों पर वापस विरोध-प्रदर्शनों के लिये पहुँच रहे हैं।

ANI
इस बीच राकेश टिकैत ने केंद्र सरकार से सवाल किया है कि वह किसानों को बताए कि आखिर तीन नए कृषि क़ानूनों को वह क्यों वापस नहीं ले सकती है। उन्होने कहा हम वादा करते हैं कि सरकार का सिर दुनिया के सामने झुकने नहीं देंगे।
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एक बार फिर से आंदोलन हूंकार भरते किसानो के मध्य टिकैत ने कहा कि सरकार की ऐसी क्या मजबूरी है कि वह नए कृषि क़ानूनों को निरस्त नहीं करने पर अड़ी हुई है?

टिकैत ने जोर देते हुये कहा कि सरकार के साथ हमारी विचारधारा की लड़ाई है और ये लाठी-डंडों, बंदूकों से नहीं लड़ी जा सकती और ना ही उसके ज़रिए इसे दबाया जा सकता है। किसान तभी घर लौटेंगे जब नए क़ानून वापस ले लिए जाएंगे।

 

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