आरबीआई का सुप्रीम कोर्ट में जवाब पेश, नहीं देगें ब्याज पर छूट

आरबीआई का सुप्रीम कोर्ट में जवाब पेश, नहीं देगें ब्याज पर छूट


छोटा अखबार।
कोविड—19 महामारी के चलते लॉकडाउन के दौरान किश्तों में राहत प्रदान करने के मामले में भारतीय रिजर्व बैंक ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब पेश कर दिया है। अपने जवाब में रिजर्व बैंक ने कहा है कि किस्तों में छूट के दौरान ब्याज पर छूट से बैंकों की वित्तीय स्थिरता का खतरा होगा। महामारी केो ध्यान रखते हुए रिजर्व बैंक ने 27 मार्च को एक आदेश जारी किया था। आदेश में बैंकों को तीन माह के लिए किश्तों के भुगतान के लिए राहत प्रदान की गई थी। फिर से 22 मई को रिजर्व बैंक ने 31 अगस्त तक तीन माह की राहत प्रदान करने की घोषणा की। 



सुप्रीम कोर्ट में याचिका के जरिए कहा गया कि बैंक किश्तों पर छूट देने के साथ-साथ ब्याज लगा रहे हैं जो कि नियमानुसार नहीं है। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक और केंद्र सरकार से जवाब मांगा था। आरबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में हलफ़नामा देकर 6 माह की मोराटोरियम अवधि के में ब्याज माफी की मांग को गलत बताया है। आरबीआई ने कहा है कि लोनधारकों को 6 माह की किश्तें अभी न देकर बाद में देने की राहत प्रदान की गई है। लेकिन इस अवधि का ब्याज भी नहीं लिया गया तो बैंकों को 2 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होगा।बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका में मांग की गई  कि लॉकडाउन में लोन की किश्तों के ब्याज में छूट मिलनी चाहिए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआई और केन्द्र सरकार से जवाब मांगा था। सुप्रीम कोर्ट मामले में आज सुनवाई करेगा।



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